होर्मुज संकट: अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में पुलों को बनाया निशाना, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों पर दागीं मिसाइलें
होर्मुज संकट: अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में पुलों को बनाया निशाना, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों पर दागीं मिसाइलें
वॉशिंगटन/तेहरान, 17 जुलाई (2026): अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति का दायरा बढ़ाते हुए अब पारंपरिक ठिकानों के बजाय ईरान के बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. शुक्रवार सुबह अमेरिकी वायुसेना द्वारा दक्षिणी ईरान में किए गए हवाई हमलों में कई महत्वपूर्ण पुलों को नष्ट कर दिया गया, जिसमें कम से कम 7 लोगों की मौत की खबर है.
यह हमला ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर से अपना नियंत्रण हटाने के लिए मजबूर करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
क्या है होर्मुज संकट की असली जड़?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना आक्रामक रुख नहीं बदला, तो उसके पावर प्लांट और अन्य बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा.
नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade): दबाव बनाने के लिए अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को फिर से कड़ा कर दिया है, ताकि ईरान के कच्चे तेल के निर्यात को पूरी तरह ठप किया जा सके.
वैश्विक महत्व: गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील ऊर्जा गलियारा है, जहाँ से शांति काल में वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% (एक-पांचवां हिस्सा) गुजरता है.
ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में हाई अलर्ट
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया है.
कतर, बहरीन और कुवैत निशाने पर: ईरान द्वारा किए गए ताजा मिसाइल हमलों के बाद कतर में आपातकालीन चेतावनी जारी की गई और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई. इसके अलावा बहरीन और कुवैत स्थित ठिकानों को भी निशाना बनाने की खबरें हैं.
”अजेय रेड लाइन”: ईरान के ‘खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम जोल्फघारी ने दोटूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह ईरान के लिए एक “अजेय रेड लाइन” है.
बुनियादी ढांचे और सामरिक ठिकानों पर चोट
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित होर्मोजगन प्रांत के ‘बंदर-ए-खामिर’ में प्रमुख पुलों को ध्वस्त कर दिया है. इसके अतिरिक्त, तेहरान और सेम्नान प्रांत में भी हवाई हमले किए गए हैं. ये वही इलाके हैं जहाँ ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस प्रोग्राम संचालित होता है.
वैश्विक तेल व्यापार और शिपिंग संकट
लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस (Lloyd’s List Intelligence) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार को गहरा धक्का लगा है.
इस महीने की शुरुआत में ही इस जलमार्ग से कार्गो (मालवाहक जहाजों) की आवाजाही में 25% तक की गिरावट दर्ज की गई थी.
सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कई वाणिज्यिक जहाज अपनी लोकेशन ट्रैकिंग (AIS) बंद करके यात्रा कर रहे हैं, जबकि कई जहाज संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने के बजाय खुले समुद्र में ही लंगर डाले खड़े हैं.
जॉर्डन में अमेरिकी विमानों को नष्ट करने का ईरानी दावा
संघर्ष की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना के कई रिफ्यूलिंग विमानों और फाइटर जेट्स को अपने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में नष्ट कर दिया है. ईरान का आरोप है कि अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में खुजेस्तान प्रांत के अहवाज (Ahvaz) में बच्चों का एक कैंसर अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गया, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस घटना के बाद जॉर्डन के नागरिकों से अपने देश में मौजूद अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की अपील की है. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) या स्वतंत्र स्रोतों द्वारा इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है.
मानवीय संकट और टूटता शांति समझौता
ईरानी मीडिया के दावों के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हैं. देश के पावर स्टेशनों को पहुंचे नुकसान के कारण ईरान में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है, जिसके चलते नागरिकों से पीक आवर्स में एयर कंडीशनर बंद रखने की अपील की गई है. ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि वे “कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेंगे”.
निष्कर्ष: सिर्फ एक हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच जिस शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें आ रही थीं, वह मौजूदा भारी गोलाबारी और हमलों के बीच पूरी तरह ढह चुका है. यदि दोनों पक्षों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट और तीसरे विश्व युद्ध जैसी विभीषिका में बदल सकता है.
