देहरादून में युवा राजनीति का रोमांच: राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ vs भाजपा का जैस्मीन सैंडलस काउंटर — आखिर कौन पड़ा भारी?
देहरादून में युवा राजनीति का रोमांच: राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ vs भाजपा का जैस्मीन सैंडलस काउंटर — आखिर कौन पड़ा भारी?
उत्तराखंड की राजधानी में शुक्रवार को युवा राजनीति का दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। एक तरफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम, जहां पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर हजारों युवा उमड़े। दूसरी तरफ भाजपा सरकार की तरफ से काउंटर स्ट्रैटजी के रूप में पॉपुलर पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस का लाइव शो।
सवाल यह है — आखिर कौन किस पर भारी पड़ा?
राहुल गांधी का हमला और युवाओं का जोश
परेड ग्राउंड में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए। 7.5 करोड़ युवा प्रभावित हुए, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं मिली।” राहुल ने परीक्षा प्रणाली को “रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड” की संज्ञा दी और शिक्षा सुधार, बेरोजगारी व मानसिक स्वास्थ्य संकट पर जोर दिया।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ उमड़ी। युवा राहुल से सीधा संवाद करने और अपनी समस्याएं रखने पहुंचे। एक छोटी बच्ची के साथ राहुल का भावुक पल (चॉकलेट देते हुए उसके पायलट बनने के सपने पर बात) वायरल हो गया। कांग्रेस ने इसे युवाओं की असली आवाज बताया और दावा किया कि यह कार्यक्रम पूरे देश में शिक्षा क्रांति की शुरुआत है।
भाजपा का काउंटर: जैस्मीन सैंडलस का लाइव शो
राहुल के कार्यक्रम के ठीक नजदीक (कुछ सौ मीटर दूरी पर) जैस्मीन सैंडलस का लाइव परफॉर्मेंस रखा गया। सूत्रों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, यह शो राहुल के इवेंट को काउंटर करने के लिए खास तौर पर आयोजित किया गया था। जैस्मीन ने अपने हिट गाने — ‘शरारत’, ‘Illegal Weapon’, ‘Jaiye Sajana’ आदि — गाकर माहौल गर्म किया।
भाजपा की रणनीति साफ थी — युवाओं को मनोरंजन देकर राहुल के मुद्दा आधारित कार्यक्रम से ध्यान बटाना। हालांकि, जैस्मीन के शो में भीड़ जुटाने के बावजूद, युवाओं का बड़ा हिस्सा राहुल के कार्यक्रम की तरफ रुख करता नजर आया। कई युवाओं ने कहा, “गाने तो बाद में भी सुन सकते हैं, लेकिन भविष्य के मुद्दे पर बात करने का मौका कम मिलता है।”
कौन पड़ा भारी? युवाओं का फैसला
राहुल गांधी की जीत: भीड़, जोश और मुद्दों पर फोकस के लिहाज से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम सफल रहा। कांग्रेस इसे युवा वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने वाला बता रही है। सोशल मीडिया पर राहुल के वीडियो और फोटोज ज्यादा वायरल हुए।
जैस्मीन सैंडलस/भाजपा का प्रयास: मनोरंजन के जरिए काउंटर करने की कोशिश सराहनीय थी, लेकिन युवाओं ने मुद्दों को प्राथमिकता दी। शो हुआ, लेकिन मुख्य सुर्खियां राहुल के कार्यक्रम को मिलीं।
राजनीतिक विश्लेषण: यह मुकाबला 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों की झलक दिखाता है। भाजपा (सीएम पुष्कर सिंह धामी) विकास और युवा स्कीम्स पर जोर दे रही है, जबकि कांग्रेस शिक्षा संकट और पेपर लीक को मुख्य हथियार बना रही है। राहुल का देहरादून दौरा युवाओं के बीच अपनी छवि को ‘Gen-Z लीडर’ के रूप में मजबूत करने की कोशिश लगता है।
दोनों पक्ष अब इस कार्यक्रम को अपने पक्ष में प्रचारित कर रहे हैं। कांग्रेस इसे “युवाओं की जीत” बता रही है, जबकि भाजपा इसे सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम मान रही है।
निष्कर्ष: युवा वोट बैंक की लड़ाई में राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ इस दौर में भारी पड़ी नजर आई। लेकिन राजनीति में अंतिम फैसला मतदान के दिन होता है। देहरादून का यह दिन उत्तराखंड की सियासी जंग को और तेज कर गया है।
