देहरादून में गरजे राहुल गांधी: बोले– ‘पेपर लीक ने बर्बाद किया लाखों युवाओं का भविष्य, पूरा सिस्टम है शामिल’
देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और चरमराती परीक्षा प्रणाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की वकालत की है। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था 19वीं सदी की सोच पर चल रही है, जबकि आज के युवाओं को 21वीं सदी की आधुनिक और छात्र-केंद्रित व्यवस्था की जरूरत है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश के युवाओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया। इस रैली में उनके साथ मंच पर पेपर लीक से प्रभावित छात्र, आत्महत्या करने वाली छात्रा रिया कुमारी थापा के पिता और प्रसिद्ध गणित शिक्षक अभिनय सर भी मौजूद थे।
10 वर्षों में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित
राहुल गांधी ने रैली में चौकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले दस वर्षों में देश के भीतर 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे लगभग साढ़े सात करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में एक संगठित ‘पेपर लीक माफिया’ सक्रिय है, जिसने कोचिंग सेंटरों से लेकर मंत्रालयों तक अपनी पैठ बना रखी है। लीक हुए विभिन्न प्रश्न-पत्रों के ‘रेट कार्ड’ का जिक्र करते हुए उन्होंने हैरानी जताई कि आज तक इस माफिया से जुड़े बड़े दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिल सकी है।
रोजगार के 5 में से 4 दरवाजे बंद: सरकारी नौकरी ही एकमात्र सहारा
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने देश में बढ़ती बेरोजगारी और सीमित होते अवसरों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी के रास्ते पर चलने को मजबूर हैं, क्योंकि बाकी सभी अवसर बंद हो चुके हैं। उन्होंने इसके चार मुख्य कारण बताए:
- ठप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: देश में ज्यादातर सामान चीन से आयात हो रहे हैं, जिससे स्थानीय विनिर्माण पूरी तरह ठप है।
- उद्यमिता (बिजनेस) के रास्ते बंद: बैंक केवल कुछ चुनिंदा बड़े औद्योगिक समूहों की मदद कर रहे हैं, सामान्य युवाओं को नया व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन नहीं मिलता।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मार: कॉर्पोरेट और आईटी सेक्टर की नौकरियों पर एआई ने बहुत जबरदस्त चोट की है, जिससे वहां अवसर घटे हैं।
- पब्लिक सेक्टर का निजीकरण: सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के कारण युवाओं के लिए नौकरियों का यह सुरक्षित दरवाजा भी लगभग बंद हो चुका है।
उन्होंने बताया कि इन बंद दरवाजों के कारण लगभग 9 करोड़ अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें से केवल 6 लाख (यानी 150 में से केवल 1 छात्र) ही सफल हो पाते हैं।
पेपर लीक 99% ईमानदार छात्रों के हक पर डाका
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश की परीक्षा प्रणाली में दो रास्ते बन गए हैं। पहला रास्ता ईमानदारी और कड़ी मेहनत का है, जहां छात्र आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव से जूझते हुए तैयारी करते हैं। एक छात्र की पढ़ाई और तैयारी पर औसतन 9 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसके लिए परिवार अपनी जीवनभर की जमापूंजी लगा देते हैं।
वहीं दूसरा रास्ता पेपर लीक का ‘चोर दरवाजा’ है, जिसका इस्तेमाल केवल वे 1 प्रतिशत अमीर लोग कर पाते हैं जिनके पास बेईमानी का पैसा है। उन्होंने इसे देश के युवाओं के साथ हो रहा सबसे बड़ा अन्याय बताते हुए कहा कि पेपर लीक वास्तव में 99 प्रतिशत ईमानदार छात्रों के हक पर डाका है।
सुधार के लिए राहुल गांधी के प्रमुख सुझाव और मांगें
पेपर लीक जैसी राष्ट्रीय समस्या से निपटने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए राहुल गांधी ने निम्नलिखित कदम उठाने पर जोर दिया:
- राष्ट्रीय सहमति: पेपर लीक को रोकने के लिए सभी राजनीतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर एक राष्ट्रीय सहमति (नेशनल कंसेंसस) बनानी चाहिए।
- छात्र-केंद्रित आधुनिक व्यवस्था: परीक्षा की तारीखों में लचीलापन हो, सुरक्षित प्रश्न बैंक (Question Bank) तैयार किए जाएं और रैंडम प्रश्न पत्र प्रणाली लागू की जाए।
- स्वतंत्रता और जवाबदेही: परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप और आरएसएस (RSS) जैसी विचारधारा के नियंत्रण से मुक्त रखा जाए। शिक्षा के निजीकरण पर तुरंत रोक लगे।
- सख्त सजा और मुआवजा: पेपर लीक के दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए। इसके साथ ही प्रभावित छात्रों के लिए तुरंत पुन: परीक्षा (Re-exam) आयोजित की जाए और उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा देकर उनके हितों की रक्षा की जाए।
