बदरीनाथ दान चोरी मामले में पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी का बड़ा बयान: ‘कलयुगी भक्तों की अक्ल ठिकाने आएगी, जाएंगे जेल’
बदरीनाथ दान चोरी मामले में पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी का बड़ा बयान: ‘कलयुगी भक्तों की अक्ल ठिकाने आएगी, जाएंगे जेल’
देहरादून: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में सामने आए दान चोरी प्रकरण को लेकर राज्य में सियासी और सामाजिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पुलिस की तफ्तीश और उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच के बीच अब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी का इस मामले पर पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे मुद्दे को एक नई बहस दे दी है।
”कलयुगी भक्तों की अक्ल ठिकाने आ जाएगी” — कोश्यारी
सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर इन दिनों सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त रहने वाले भगत सिंह कोश्यारी ने चोरी की इस घटना पर बेहद तीखा और आध्यात्मिक तंज कसा है।
उन्होंने दोषियों को चेतावनी देते हुए कहा:
”ऐसे लोगों के खिलाफ कानून अपना काम करेगा और उन्हें उनके गलत कृत्यों की सजा अवश्य मिलेगी। ये कुछ कलयुगी भक्त हैं, जिनकी भविष्य में अक्ल ठिकाने आ जाएगी। पहले वे पकड़े जाएंगे, फिर जेल जाएंगे और उसके बाद खुद ही सुधर जाएंगे। हर युग में ऐसे तत्व रहे हैं; त्रेता युग में भी कुछ लोगों ने माता सीता का हरण करने का दुस्साहस किया था, इसलिए आज के समय में ऐसे पापियों का होना कोई नई बात नहीं है।”
त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान से ‘देवस्थानम बोर्ड’ की चर्चा फिर गर्म
कोश्यारी से ठीक पहले उत्तराखंड के एक और पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। त्रिवेंद्र रावत ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान बनाए गए विवादित देवस्थानम बोर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि, ‘मंदिरों के बेहतर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता के लिए जिन कड़े नियमों व व्यवस्थाओं की आवश्यकता थी, उन्हें उन्होंने पहले ही लागू करने का प्रयास किया था।’ उनके इस बयान के बाद राज्य में एक बार फिर भंग हो चुके देवस्थानम बोर्ड को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
मामले में अब तक की कार्रवाई और जांच:
मुख्य आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस चोरी प्रकरण के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम आरोपी से सघन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस चोरी में मंदिर प्रबंधन या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
उच्चस्तरीय प्रशासनिक समिति गठित: शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल मंडल आयुक्त (कमिश्नर) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल जांच समिति बनाई है। यह समिति मंदिर की दान पेटियों की सुरक्षा प्रणाली, सीसीटीवी कैमरों और प्रशासनिक चूक की समीक्षा कर रही है।
मंदिर समिति (BKTC) का पक्ष: विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होते ही मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था में बड़े सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
यह दान चोरी मामला अब सिर्फ एक साधारण अपराध नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड में धार्मिक आस्था, वीआईपी सुरक्षा, मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता और राजनीतिक बयानबाजी का मुख्य केंद्र बन चुका है।
