BKTC नियुक्तियों पर भाजपा-कांग्रेस में वार-पलटवार: चंदा चोरी प्रकरण को लेकर गणेश गोदियाल और विनोद चमोली आमने-सामने
BKTC नियुक्तियों पर भाजपा-कांग्रेस में वार-पलटवार: चंदा चोरी प्रकरण को लेकर गणेश गोदियाल और विनोद चमोली आमने-सामने
देहरादून:बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में नियुक्तियों और हाल ही में सामने आए चंदा चोरी प्रकरण को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भाजपा ने पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष और वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर नियुक्तियों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिस पर गोदियाल ने भी तीखा पलटवार किया है।
भाजपा का आरोप: “चोर साबित हुए कर्मचारी को गोदियाल ने किया था स्थायी”
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने प्रेस वार्ता कर चंदा चोरी प्रकरण में निलंबित हुए एक वैयक्तिक सहायक (PA) का हवाला देते हुए सीधे गणेश गोदियाल को घेरा। चमोली ने कहा:
”चंदा चोरी प्रकरण में जिस वैयक्तिक सहायक का निलंबन हुआ है, उसकी नियुक्ति वर्ष 2014 में तब स्थायी की गई थी जब वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल बीकेटीसी के अध्यक्ष (2012 से 2017) थे। इसलिए इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी गणेश गोदियाल की बनती है और उन्हें इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि जब इस मामले की विस्तृत जांच होगी, तो निश्चित रूप से गोदियाल का कार्यकाल भी जांच के दायरे में आएगा। सरकार धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर संवेदनशील है, इसीलिए इस मामले पर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
गणेश गोदियाल का पलटवार: “नियमों के तहत हुए थे कर्मचारी स्थायी, भाजपा का तर्क हास्यास्पद”
भाजपा प्रवक्ता के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और हास्यास्पद बताया। उन्होंने स्पष्ट किया:
”मेरे कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों को स्थायी करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह नीति और स्थापित नियमों के आधार पर की गई थी। इसमें किसी भी तरह की ‘पिक एंड चूज’ (पक्षपात) की नीति नहीं अपनाई गई। कई वर्षों से मंदिर समिति में संविदा या अल्प मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों के कल्याण के लिए एक पारदर्शी नीति बनाकर उन्हें परमानेंट किया गया था।”
गोदियाल का तीखा कटाक्ष
विनोद चमोली के माफी मांगने वाले बयान पर तंज कसते हुए गोदियाल ने कहा कि यह तर्क बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने कटाक्ष किया, “अगर कोई व्यक्ति भविष्य में स्मार्ट सिटी मामले या किसी अन्य घोटाले में दोषी पाया जाता है, तो क्या इसका अर्थ यह निकाला जाए कि उस व्यक्ति के माता-पिता उसकी पैदाइश के लिए समाज से माफी मांगें?”
बीकेटीसी के इस विवाद ने प्रदेश में एक बार फिर भ्रष्टाचार और नियुक्तियों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
