मिडिल ईस्ट संकट: पीएम नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की फोन पर बात, ईरान और तुर्की के रुख पर हुई चर्चा
मिडिल ईस्ट संकट: पीएम नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की फोन पर बात, ईरान और तुर्की के रुख पर हुई चर्चा
यरूशलेम / वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर लंबी बातचीत की है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू को खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में अमेरिकी सेना की हालिया गतिविधियों और रणनीतियों की जानकारी दी।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के बयानों पर जताई चिंता
फोन कॉल के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और उनके सहयोगियों द्वारा इजरायल के खिलाफ दी गई हालिया टिप्पणियों का मुद्दा बेहद संजीदगी से उठाया। हालांकि, बयान में किसी विशेष टिप्पणी का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन इसे लेकर इजरायली नेतृत्व में भारी नाराजगी है।
तनाव की वजह: हाल ही में राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल पर अमेरिका-ईरान कूटनीति को जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाया था और इजरायली सरकार को ‘युद्ध की आदी’ करार दिया था। इसके अलावा, इजरायल ने तुर्की को अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान बेचे जाने की संभावना पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़े नए सिरे से हमले
नेतन्याहू और ट्रंप के बीच यह बातचीत ऐसे संवेदनशील समय में हुई है, जब मंगलवार रात से गुरुवार के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर हिंसक झड़पें और नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों के जवाब में अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के भीतर कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इन अमेरिकी हमलों में ईरान को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और उसका बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) तबाह हुआ है।
”लेबनान से तब तक नहीं हटेंगे, जब तक हिज्बुल्लाह निहत्था न हो जाए”
इस बीच, इजरायल के रक्षा और सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि सेना ईरान और लेबनान की हर गतिविधि पर बारीक नजर रख रही है और तत्काल सैन्य कार्रवाई के लिए अलर्ट मोड पर है।
वहीं, इजरायल के नवनियुक्त रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि इजरायली सेना (IDF) तब तक लेबनान से पीछे नहीं हटेगी, जब तक हिज्बुल्लाह के सभी हथियारों को पूरी तरह जब्त नहीं कर लिया जाता।
काट्ज के कार्यालय द्वारा जारी बयान में संप्रभुता का हवाला देते हुए कहा गया:
”हमें लेबनान की सीमा में दाखिल होने के लिए किसी बाहरी देश या पक्ष की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी, और न ही वहां बने रहने के लिए हमें किसी की इजाजत की जरूरत है। जब तक हमारा लक्ष्य पूरा नहीं होता, सैन्य अभियान जारी रहेगा।”
