ई20 ईंधन से माइलेज में मामूली कमी, लेकिन इंजन और पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद: पेट्रोलियम मंत्रालय
ई20 ईंधन से माइलेज में मामूली कमी, लेकिन इंजन और पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद: पेट्रोलियम मंत्रालय
नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर एथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को लेकर चल रहे भ्रम को दूर किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ई20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) से कुछ गाड़ियों के माइलेज में 3-5 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले वाहन चालकों को बेहतर पिकअप, हाई ऑक्टेन रेटिंग, आसान एक्सेलरेशन और इंजन का क्लीन ऑपरेशन जैसे बड़े फायदे मिलते हैं। मंत्रालय के अनुसार, ई20 ईंधन ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक साफ, बेहतर क्वालिटी वाला और ज्यादा कुशल है।
कंपनियों ने नहीं देखी जंग या खराबी की समस्या, गाड़ियां दे रही हैं पूरी वारंटी
मंत्रालय ने सुनी-सुनाई बातों को खारिज करते हुए वाहन निर्माताओं के वास्तविक आंकड़े पेश किए:
मारुति सुजुकी: कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की, जिनमें 1.5 करोड़ पुरानी और गैर-ई20 सर्टिफाइड गाड़ियां शामिल थीं। इस दौरान ई20 ईंधन की वजह से इंजन में जंग लगने, पार्ट्स खराब होने या असामान्य घिसाव की कोई समस्या नहीं देखी गई।
हीरो मोटोकॉर्प: देश की बड़ी टू-व्हीलर कंपनी ने भी फील्ड से इसी तरह के सकारात्मक अनुभव की पुष्टि की है।
बयान में कहा गया कि अगर ऑटोमोबाइल कंपनियां इस ईंधन से संतुष्ट नहीं होतीं, तो वे कभी इसका समर्थन नहीं करतीं या गाड़ियों पर वारंटी नहीं देतीं। आज लगभग हर कंपनी पुरानी और नई सभी गाड़ियों के लिए वारंटी दे रही है।
प्रीमियम पेट्रोल से तुलना सही नहीं
मंत्रालय ने साफ किया कि आम पेट्रोल और प्रीमियम पेट्रोल की तुलना करना ठीक नहीं है। प्रीमियम ईंधन विशेष उत्पाद होते हैं, जिनमें परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले खास एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, इसलिए वे सीमित मात्रा में और अधिक कीमत पर बिकते हैं। देश भर में शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 के लिए अलग-अलग सप्लाई चेन चलाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹1 लाख करोड़ का वार्षिक निवेश
भारत ने जून 2022 में ही तय समय से 5 महीने पहले 10% एथेनॉल मिश्रण (ई10) का लक्ष्य हासिल कर लिया था। ई20 के रोडमैप पर 2021 से ही काम चल रहा है। इस मिश्रण लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकारी बैंकों ने एथेनॉल उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर में हर साल लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे देश भर में विशेष एथेनॉल प्लांट, डिस्टिलरी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार किए गए हैं। पर्यावरण के लिहाज से ई20 ईंधन पूरे लाइफसाइकिल के दौरान कार्बन एमिशन को करीब 40 प्रतिशत तक कम कर देता है।
