उत्तराखंड

उत्तराखंड: 4 जुलाई से फिर शुरू होगा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम, सीएम धामी ने दिए 15 दिन के विशेष अभियान के निर्देश

उत्तराखंड: 4 जुलाई से फिर शुरू होगा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम, सीएम धामी ने दिए 15 दिन के विशेष अभियान के निर्देश

​उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार एक बार फिर जनता की समस्याओं का उनके घर पर ही समाधान करने के लिए ‘जन-जन की सरकार-जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है। पिछले वर्ष इस अभियान की भारी सफलता को देखते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2026 से 15 दिनों का एक विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं।

​इस अभियान के तहत राज्य के सभी जिलों, ब्लॉकों और तहसीलों में विशेष शिविर (कैंप) लगाए जाएंगे, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर ही जनता की शिकायतों और समस्याओं का निस्तारण करेंगे।

​सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आम जनता को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ न करनी पड़े। इसके बजाय, शासन-प्रशासन खुद जनता के पास पहुंचे। इसी विजन के साथ पिछले साल दिसंबर में 45 दिनों का पहला अभियान चलाया गया था। अब, मुख्यमंत्री के कार्यकाल के सफल पांच वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर इस अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इस बार इसे 15 दिवसीय ‘सेवा पखवाड़ा’ के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जनसमस्याओं के निवारण के साथ-साथ लोगों को सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।

​पिछली बार 5 लाख से अधिक नागरिकों ने लिया था हिस्सा

​पिछले दिसंबर माह में शुरू हुए 45 दिवसीय अभियान के आंकड़े बेहद सफल रहे थे:

​कुल शिविर: राज्यभर में 681 विशेष शिविरों का आयोजन किया गया था।

​जनभागीदारी: इन शिविरों में 5,33,452 नागरिकों ने प्रत्यक्ष (Direct) रूप से हिस्सा लिया।

​त्वरित समाधान: अभियान के दौरान करीब 33 हजार जन शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण किया गया।

इस बड़े प्रयास को प्रशासनिक हलकों में ‘गवर्नेंस की बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सराहा गया था।

​”लोगों को बिना किसी भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिलीं, यही सुशासन की पहली सीढ़ी है। इसी क्रम में सभी जनपदों में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इसमें सभी सक्षम अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

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