Thursday, September 10, 2026
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पाकिस्तान में गहराया जल संकट: पानी बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े सिंध और पंजाब प्रांत, दादू नहर में 82% की कमी

पाकिस्तान में गहराया जल संकट: पानी बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े सिंध और पंजाब प्रांत, दादू नहर में 82% की कमी

​इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर दो बड़े प्रांत—सिंध और पंजाब—एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। खरीफ सीजन के दौरान सिंध प्रांत में पानी की भारी किल्लत के कारण हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ‘डॉन’ (Dawn) की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध के सुक्कुर बैराज की राइट बैंक नहर प्रणाली में पानी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस जल संकट के कारण लरकाना, कंबर-शहदादकोट, दादू, शिकारपुर और बलूचिस्तान के कई कृषि क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

​प्रमुख नहरों में पानी की भारी कमी (सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़े):

​दादू कैनाल: 82 प्रतिशत पानी की कमी

​नॉर्थ वेस्ट कैनाल (NWC): 64.1 प्रतिशत पानी की कमी

​राइस कैनाल: 38 प्रतिशत पानी की कमी

​सिंध का आरोप: पंजाब प्रांत कर रहा है पानी की चोरी

​सिंध सरकार के अधिकारियों और स्थानीय किसानों का सीधा आरोप है कि इस संकट की मुख्य वजह पंजाब प्रांत द्वारा अपने निर्धारित कोटे से अधिक पानी का इस्तेमाल करना है।

​रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब प्रांत के लिए 44,000 क्यूसेक पानी आवंटित है, लेकिन वह नियमों का उल्लंघन करते हुए 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो उसके तय हिस्से से लगभग 21 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा तौंसा बैराज से भी पंजाब द्वारा निर्धारित मात्रा से ज्यादा पानी निकाले जाने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ, चश्मा बैराज में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे साफ है कि ऊपरी क्षेत्रों (पंजाब) में पानी जमा किया जा रहा है और निचले इलाकों (सिंध) को भूखा मारा जा रहा है। सिंध सरकार ने 1,30,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन उसे केवल 1,00,000 क्यूसेक पानी ही दिया जा रहा है।

​अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा

​पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के सिंध अध्यक्ष निसार अहमद खुखरो ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि खरीफ सीजन में सिंध के हिस्से का पानी रोकना प्रांत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने बताया कि सिंध हर साल 55 लाख टन चावल का उत्पादन करता है, जिससे देश को लगभग 1.4 अरब डॉलर की निर्यात आय होती है।

​नहरों के अंतिम छोर (Tail-end) तक पानी न पहुंचने के कारण किसान अभी तक धान की नर्सरी (पौध) भी तैयार नहीं कर पाए हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही पानी नहीं छोड़ा गया, तो देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई नामुमकिन होगी।

​1991 के जल बंटवारा समझौते पर उठे सवाल

​इस विवाद ने एक बार फिर पाकिस्तान के ‘1991 जल बंटवारा समझौते’ की विफलता को उजागर कर दिया है। जल संसाधनों के इस असमान वितरण से प्रांतों के बीच राजनीतिक और सामाजिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।

​गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में भी चोलिस्तान रेगिस्तान के लिए छह नई नहरें बनाने की सरकारी परियोजना के विरोध में सिंध प्रांत में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने कराची से उत्तर की ओर जाने वाले सभी राजमार्गों को ब्लॉक कर दिया था, जिससे पूरे देश की माल ढुलाई ठप हो गई थी और आखिरकार सरकार को घुटने टेकने पड़े थे। अब एक बार फिर वैसे ही हालात बनते दिख रहे हैं।

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