झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर बड़ी रार: कांग्रेस के प्रत्याशी उतारने के बाद JMM का पलटवार, दोनों सीटों पर ठोका दावा
झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर बड़ी रार: कांग्रेस के प्रत्याशी उतारने के बाद JMM का पलटवार, दोनों सीटों पर ठोका दावा
रांची। झारखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस—के बीच का मनमुटाव अब खुलकर चौराहे पर आ गया है।
कांग्रेस द्वारा राज्यसभा की एक सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान किए जाने के महज 12 घंटे बाद, झामुमो (JMM) ने बड़ा दांव खेलते हुए दोनों ही सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है। झामुमो के इस कड़े रुख के बाद झारखंड के सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ‘ऑल इज वेल’ के दावों की हवा निकल गई है।
CM आवास की बैठक में JMM का फैसला: “हम ही लड़ेंगे दोनों सीटें”
शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में सीएम और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद झामुमो के वरिष्ठ नेताओं योगेंद्र प्रसाद और हफीजुल हसन ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि पार्टी के सभी विधायकों की सर्वसम्मत राय है कि दोनों राज्यसभा सीटों पर झामुमो ही अपने प्रत्याशी उतारे। विधायकों ने उम्मीदवारों के चयन और अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूरी तरह अधिकृत कर दिया है। झामुमो नेताओं का कहना है कि राज्य में सबसे बड़ा राजनीतिक दल होने के नाते दोनों सीटों पर उनका स्वाभाविक और मजबूत दावा बनता है। इन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 8 जून से पहले कर दी जाएगी।
कांग्रेस ने देर रात घोषित किया था उम्मीदवार; खड़गे की बातचीत भी बेअसर
झामुमो का यह आक्रामक रुख तब सामने आया है, जब महज एक रात पहले (गुरुवार देर रात) कांग्रेस ने एआईसीसी (AICC) सचिव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को झारखंड से राज्यसभा का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था।
कांग्रेस की इस एकतरफा घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा था कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे (सीट शेयरिंग) पर अंदरूनी सहमति बन चुकी है। लेकिन झामुमो की शुक्रवार की बैठक ने पासा पलट दिया।
पर्दे के पीछे की कोशिशें हुईं नाकाम: प्रणव झा के नाम के ऐलान से दो दिन पहले खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फोन पर लंबी बातचीत की थी। इतना ही नहीं, कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने भी हाल ही में रांची का दौरा कर मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात की थी और राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को देने का पुरजोर आग्रह किया था। लेकिन झामुमो पर इन कोशिशों का कोई असर नहीं हुआ।
विधानसभा का गणित और गठबंधन की एकजुटता पर सवाल
झारखंड विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से सत्तारूढ़ गठबंधन के पास आसानी से दोनों सीटें जीतने लायक पर्याप्त बहुमत है। लेकिन सीटों को लेकर पैदा हुआ यह गतिरोध अब दोनों दलों के बीच दरार पैदा कर रहा है।
कांग्रेस का स्टैंड: उम्मीदवार घोषित करने के बाद कांग्रेस किसी भी कीमत पर पीछे हटने (नाम वापस लेने) के मूड में नहीं दिख रही है।
JMM का स्टैंड: सबसे बड़ा दल होने के नाते झामुमो अपने पैर पीछे खींचने को तैयार नहीं है और दोनों सीटों पर अपना वर्चस्व चाहती है।
नामांकन प्रक्रिया के बीचोबीच दोनों सहयोगियों के बीच बढ़ी यह खींचतान झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा दिलचस्प मोड़ बन गई है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली में बैठा कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व इस सियासी संकट का क्या तोड़ निकालता है।
