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‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’: जब खुफिया एजेंसियों और आतंकी संगठनों ने भारत के खिलाफ किया अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल

‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’: जब खुफिया एजेंसियों और आतंकी संगठनों ने भारत के खिलाफ किया अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल

​खुफिया एजेंसियों और आतंकी संगठनों की प्लेबुक में एक बात बहुत आम है—अगर किसी देश की राजनीतिक, सामाजिक व्यवस्था को तहस-नहस करना है और वहां बड़े पैमाने पर हिंसा फैलानी है, तो उन लोगों से हाथ मिलाओ जो पहले से संगठित आपराधिक गिरोह (अंडरवर्ल्ड) चला रहे हों। अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने शीतयुद्ध के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में इस नीति का इस्तेमाल किया, तो वहीं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) भारत के खिलाफ दशकों से इस ‘टेरर-क्राइम सिंडिकेट’ (आतंक और अपराध का गठजोड़) का इस्तेमाल करती आ रही है।

​भारत में अंडरवर्ल्ड के संसाधनों, इंफ्रास्ट्रक्चर और अपराधियों का इस्तेमाल कर आतंकी वारदातों को अंजाम दिए जाने के कुछ सबसे बड़े और ऐतिहासिक उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

​1. दाऊद इब्राहिम और ISI की ‘डील’ (1993 मुंबई बम धमाके)

​यह किसी देश की खुफिया एजेंसी द्वारा अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल कर दूसरे देश में आतंकी हमला कराने की दुनिया की सबसे बड़ी मिसालों में से एक है।

​पृष्ठभूमि: दाऊद इब्राहिम 1986 में मुंबई से भागकर दुबई चला गया था और वहां से तस्करी चलाता था। जनवरी 1993 में दुबई से मुंबई आ रही उसकी एक बोट को (जिसमें 2 करोड़ रुपये की चांदी थी) कराची तट के पास एक पाकिस्तानी गैंग ने कब्जे में ले लिया।

​डील: आईएसआई ने दाऊद के सामने पेशकश रखी कि अगर वह मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके कराने में उनकी मदद करेगा, तो उसका माल छुड़वा दिया जाएगा। दाऊद को इसमें दोहरा फायदा दिखा—एक तो उसका आर्थिक नुकसान बच रहा था, दूसरा दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 के दंगों के बाद मुंबई के नाराज मुसलमानों का हमदर्द बनने का मौका मिल रहा था।

​अंजाम: दाऊद ने यह काम अपने खास गुर्गे मुश्ताक उर्फ ‘टाइगर मेमन’ को सौंपा। मेमन के तटीय नेटवर्क (दाऊद फणसे उर्फ टक्ल्या) की मदद से ही रायगढ़ के दिघी और शेखाडी तटों पर ‘आरडीएक्स’ (RDX) और हथियार उतारे गए। इसके बाद 12 मार्च 1993 को मुंबई में 13 जगहों पर बम धमाके हुए।

​2. कोलकाता का अंडरवर्ल्ड और जैश-ए-मोहम्मद (2002 अमेरिकन सेंटर हमला)

​22 जनवरी 2002 को कोलकाता के अमेरिकन सेंटर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग हुई, जिसमें 6 पुलिसकर्मी मारे गए और 20 लोग घायल हुए। इस हमले के पीछे पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और कोलकाता के एक नामी गैंगस्टर आफताब अंसारी का गठजोड़ था।

​जेल की मुलाकात: आफताब अंसारी जब दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था, तब उसकी मुलाकात जैश-ए-मोहम्मद के खतरनाक आतंकी सय्यद उमर शेख से हुई थी (वही उमर शेख जिसे 1999 के कंधार विमान अपहरण कांड के दौरान भारत सरकार को रिहा करना पड़ा था)।

​समझौता: उमर शेख ने अंसारी को हथियार और हवाला नेटवर्क देने का वादा किया, जबकि बदले में अंसारी ने जैश की आतंकी साजिशों के लिए स्थानीय लड़कों की भर्ती करने की जिम्मेदारी ली। अंसारी ने कोलकाता के मशहूर कारोबारी पार्थ रॉय बर्मन के अपहरण से मिली फिरौती की रकम का एक बड़ा हिस्सा हवाला के जरिए जैश को भेजा था। बाद में भारतीय खुफिया एजेंसियों के कूटनीतिक प्रयासों के चलते अंसारी को दुबई से डिपोर्ट कर भारत लाया गया।

​3. इंडियन मुजाहिदीन का जन्म और क्रिमिनल बैकग्राउंड (2008-2011)

​साल 2008 से 2011 के बीच दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर को दहलाने वाले आतंकी संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ की जड़ें भी अपराध जगत से जुड़ी थीं।

​गैंगस्टर से आतंकी बना भटकल: इस संगठन का सह-संस्थापक रियाज शहबंदरी उर्फ रियाज भटकल खुद एक शातिर गैंगस्टर था। वह और उसका साथी निसार पहले दिल्ली के फजलू रहमान गैंग के लिए काम करते थे। बाद में दोनों ने मिलकर मुंबई में जबरन वसूली (Extortion) और हत्याएं करने के लिए “आर-एन” (R-N) गैंग बनाया। 2004 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने मटुंगा में नासिर को एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया, जबकि रियाज भटकल भागकर पाकिस्तान चला गया।

​आतंकियों के लिए कैसे मददगार बनता है अंडरवर्ल्ड का इंफ्रास्ट्रक्चर?

​आतंकी संगठन सीधे तौर पर बड़ी वारदातों के लिए अंडरवर्ल्ड के स्थापित ढांचे का फायदा उठाते हैं:

​हवाला नेटवर्क: आतंकी गतिविधियों के लिए फंड ट्रांसफर करने में अंडरवर्ल्ड के सुरक्षित हवाला चैनलों का इस्तेमाल होता है।

​चोरी के वाहन (लॉजिस्टिक्स सपोर्ट): 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए 21 बम धमाकों (56 मौतें) में इस्तेमाल की गई गाड़ियां अंडरवर्ल्ड के लिए काम करने वाले वाहन चोरों से खरीदी गई थीं। ये कारें अफजल उस्मानी नाम के शख्स ने कार चोरों के सिंडिकेट से जुटाई थीं।

​लोकल रिक्रूटमेंट: स्थानीय स्तर पर बेरोजगार और भटके हुए युवकों को पैसे का लालच देकर हमलों के लिए तैयार करने का काम भी क्रिमिनल गैंग आसानी से कर देते हैं।

​मुन्ना झिंगाड़ा का लेटेस्ट टेरर मॉड्यूल (2023 और 2026)

​दाऊद इब्राहिम गिरोह के बेहद करीबी और पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर मुन्ना झिंगाड़ा का नाम हाल के वर्षों में लगातार आतंकी साजिशों में सामने आता रहा है।

​2023 का मामला: यूपी एसटीएफ और महाराष्ट्र एटीएस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कुबूल किया कि पाकिस्तान से मुन्ना झिंगाड़ा उन्हें हैंडल कर रहा था और उनके निशाने पर भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने थे।

​2026 का खुलासा: हाल ही में (शनिवार को) दिल्ली में पकड़े गए एक नए खतरनाक टेरर मॉड्यूल की जांच में भी यह साफ हुआ है कि उनका मुख्य विदेशी हैंडलर कोई और नहीं, बल्कि मुन्ना झिंगाड़ा ही था, जो पाकिस्तान की सरजमीं से भारत में आतंक फैलाने के लिए अंडरवर्ल्ड के पुराने संपर्कों को दोबारा जिंदा करने की कोशिश कर रहा है।

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