व्यवस्था से जंग और ट्रॉयल में हार के बाद भी शेरनी के हौसले बुलंद: विनेश फोगाट बोलीं— ‘मैं हारी नहीं, 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक ही मेरा लक्ष्य’
व्यवस्था से जंग और ट्रॉयल में हार के बाद भी शेरनी के हौसले बुलंद: विनेश फोगाट बोलीं— ‘मैं हारी नहीं, 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक ही मेरा लक्ष्य’
नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती की ‘शेरनी’ कही जाने वाली दिग्गज ओलंपियन विनेश फोगाट के लिए पिछले कुछ महीने किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं रहे हैं। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) से लंबी रार, फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना और अब एशियन गेम्स ट्रॉयल में हार— विनेश की जिंदगी फिलहाल इन्हीं उतार-चढ़ावों के बीच घूम रही है। शनिवार को एशियाई खेलों के चयन ट्रॉयल के 53 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में विनेश को हरियाणा की युवा पहलवान मीनाक्षी ने 6-4 से हरा दिया। इस हार से भले ही उनका एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना टूट गया हो, लेकिन उनका आत्मविश्वस आज भी चट्टान की तरह अडिग है।
मुकाबले के तुरंत बाद विनेश ने साफ शब्दों में कहा, “मैं हारी नहीं हूं। मैं पूरी व्यवस्था से अकेले लड़ रही थी। मैं एक तरफ थी और बाकी सब दूसरी तरफ, लेकिन मैं आज भी गर्व के साथ मैट पर खड़ी हूं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या 2028 का लॉस एंजिल्स ओलंपिक अभी भी उनका लक्ष्य है, तो उन्होंने बेहद सकारात्मक लहजे में कहा, “बिल्कुल, मैं लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए ही मैट पर वापस आई हूं।”
मां बनने के बाद वापसी ही मेरी सबसे बड़ी जीत
पेरिस ओलंपिक 2024 के फाइनल से दिल तोड़ने वाले तरीके से बाहर होने के बाद विनेश पहली बार किसी आधिकारिक मुकाबले में उतरी थीं। 31 वर्षीय विनेश ने भावुक होते हुए कहा कि मातृत्व और प्रशासनिक लड़ाइयों के बाद मैट पर लौटना ही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
बेटे के जन्म के 10 महीने बाद वापसी: विनेश ने कहा, “मेरे बेटे के जन्म को अभी सिर्फ 10 महीने हुए हैं। इतनी जल्दी मैट पर लौटकर नई पीढ़ी की पहलवानों को टक्कर देना मेरे लिए गर्व की बात है। मुझे उम्मीद है कि मैं अपने बेटे और देश की कई महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बनूंगी।”
अदालत का फैसला ऐतिहासिक: दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ट्रॉयल में शामिल होने की अनुमति देने वाले आदेश को विनेश ने ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अब भविष्य में मां बनने के बाद वापसी करने वाली महिला पहलवानों के लिए नीति बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
महासंघ पर लगाया ‘मानसिक उत्पीड़न’ और भेदभाव का आरोप
हार के चंद मिनटों बाद ही विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश की गई:
वजन वर्ग को लेकर एक घंटे तक बहस: विनेश ने आरोप लगाया, “शनिवार सुबह जब मुझे अपनी रिकवरी और खेल पर ध्यान देना चाहिए था, तब अधिकारी मुझसे एक घंटे तक बहस कर रहे थे। मेरी इच्छा 53 किग्रा वर्ग में लड़ने की थी, लेकिन उन्होंने मुझे पत्र थमाकर कहा कि मैं केवल 50 किग्रा में ही लड़ सकती हूं। यह सरासर मानसिक उत्पीड़न था।”
ड्रॉ में जानबूझकर की गई गड़बड़ी: उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूरी चयन प्रक्रिया उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार की गई थी। उनके ड्रॉ में जानबूझकर सभी मजबूत पहलवानों को रखा गया और मैचों का शेड्यूल ऐसा बनाया गया जिससे सेमीफाइनल से पहले ही उनकी पूरी ऊर्जा खत्म हो जाए।
हार स्वीकार की, कमियों को सुधारकर करेंगी मजबूत वापसी
तमाम शिकायतों और व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी के बावजूद विनेश ने खेल भावना दिखाते हुए अपनी हार की जिम्मेदारी पूरी तरह स्वीकार की। उन्होंने माना कि मैट से लंबे समय तक दूर रहने के कारण फिटनेस और स्टैमिना (सहनशक्ति) पर असर पड़ा है।
उन्होंने कहा, “मैं अपनी हार स्वीकार करती हूं। मैंने लगभग दो साल से किसी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था और मां बनने के बाद यह मेरा पहला टूर्नामेंट था। मुझे प्रतिस्पर्धी अनुभव की कमी खली। लेकिन इस मुकाबले ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ा दिया है कि मैं आज भी देश की सबसे बेहतरीन युवा लड़कियों को हरा सकती हूँ। मैं और कड़ी मेहनत करूंगी और पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर वापसी करूंगी।”
