राजनीति

बिहार में सियासी हलचल: पूर्व CM राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस, 10 सर्कुलर रोड अब मंत्री नंद किशोर राम का नया ठिकाना

बिहार में सियासी हलचल: पूर्व CM राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस, 10 सर्कुलर रोड अब मंत्री नंद किशोर राम का नया ठिकाना

​पटना। बिहार की सियासत में लंबे समय से सत्ता और शक्ति का केंद्र रहा ’10 सर्कुलर रोड’ स्थित सरकारी बंगला अब खाली होगा। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को यह आवास खाली करने का दोबारा नोटिस जारी किया है। सरकार ने यह वीवीआईपी बंगला अब बिहार के पशुपालन, मत्स्य एवं डेयरी संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है।

​39 हार्डिंग रोड होगा राबड़ी देवी का नया पता

​भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 10 सर्कुलर रोड के बदले राबड़ी देवी को पटना के पॉश इलाके में स्थित 39 हार्डिंग रोड का बंगला अलॉट किया गया है। राबड़ी देवी को यह नया आवास बिहार विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की हैसियत से आवंटित हुआ है।

​अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मंत्रियों के लिए आधिकारिक आवासों की निर्धारित श्रेणियां तय होती हैं, जिसके तहत 10 सर्कुलर रोड का बंगला विभागीय प्रक्रिया के तहत नए मंत्री को दिया गया है। इस तरह के फेरबदल प्रशासनिक नियमों के तहत पहले भी होते रहे हैं।

​नए बंगले में मिलेंगी पूर्व मुख्यमंत्री स्तर की सुविधाएं

​प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, हार्डिंग रोड स्थित नए सरकारी बंगले को राबड़ी देवी के कद और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:

​सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल: पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू होने वाली सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं और आधिकारिक प्रोटोकॉल इस नए आवास में पूरी तरह सुनिश्चित किए गए हैं।

​तैयारियां पूरी: भवन निर्माण विभाग ने इस बंगले को रहने के लिए पूरी तरह अपग्रेड और सुसज्जित कर दिया है।

​10 सर्कुलर रोड: बिहार की राजनीति का ऐतिहासिक केंद्र

​’10 सर्कुलर रोड’ सिर्फ एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि बिहार के राजनीतिक परिदृश्य का एक बड़ा प्रतीक रहा है।

​आरजेडी का पावर सेंटर: यह बंगला लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का निवास स्थान रहा है।

​रणनीतियों का गढ़: पिछले कई दशकों में आरजेडी की तमाम बड़ी रणनीतिक बैठकें, टिकटों का बंटवारा और गठबंधन की बड़ी योजनाएं इसी बंगले की चहारदीवारी के भीतर तय होती रही हैं।

​यही वजह है कि इस बंगले को खाली करने के नोटिस को लेकर पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और बयानबाजी तेज हो गई है।

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