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पीएम मोदी ने की ‘प्रगति’ की 51वीं बैठक की अध्यक्षता: ₹30,000 करोड़ से अधिक की प्रोजेक्ट्स की समीक्षा, रूफटॉप सोलर को ‘मिशन मोड’ में चलाने का निर्देश

पीएम मोदी ने की ‘प्रगति’ की 51वीं बैठक की अध्यक्षता: ₹30,000 करोड़ से अधिक की प्रोजेक्ट्स की समीक्षा, रूफटॉप सोलर को ‘मिशन मोड’ में चलाने का निर्देश

​नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विकास परियोजनाओं और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए केंद्र व राज्य सरकार के इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म ‘प्रगति’ (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह महत्वपूर्ण बैठक नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित की गई।

​प्रधानमंत्री ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि देश के नौ राज्यों में फैली कई महत्वपूर्ण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की जमीनी हकीकत और उनकी प्रगति की गहन समीक्षा की गई है।

​9 राज्यों की ₹30,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर मंथन

​सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

​प्रमुख क्षेत्र: इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से रेलवे, बिजली, पोर्ट और सड़क संपर्क (Road Connectivity) से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल थे।

​समीक्षा के मुख्य बिंदु: पीएम मोदी ने परियोजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा (Deadlines), विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और लंबे समय से लंबित मुद्दों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने को कहा।

​”बुनियादी ढांचे का उद्देश्य लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना”

​बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ (SBM-U 2.0) की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों और मुख्य सचिवों को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश दिया:

​”इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल कागजों पर या जमीन पर ढांचा तैयार करना मात्र नहीं है, बल्कि इनके जरिए देश की आम जनता के जीवन में वास्तविक और मापने योग्य (Measurable) सकारात्मक बदलाव आना सबसे ज्यादा जरूरी है।”

​प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management), अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों (Waste Processing Plants) और ‘गोबरधन योजना’ के तहत बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर तेजी से पूरा करने का आग्रह किया।

​बिजली क्षेत्र: रूफटॉप सोलर सिस्टम को ‘मिशन मोड’ में लागू करने पर जोर

​बिजली क्षेत्र की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने शहरी और आवासीय क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर सिस्टम (छतों पर सौर ऊर्जा पैनल) को बढ़ावा देने पर सबसे अधिक जोर दिया।

​उन्होंने निर्देश दिया कि इसे पूरी तरह से ‘मिशन मोड’ में लागू किया जाना चाहिए।

​इससे न केवल आम नागरिकों के बिजली के बिल (लागत) कम होंगे, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा मिलेगा।

​उन्होंने विशेष रूप से आवासीय सोसायटियों, शहरों और सार्वजनिक संस्थानों की छतों पर इसका विस्तार करने की आवश्यकता जताई।

​वधावन बंदरगाह बनेगा आधुनिक ‘मल्टी-मॉडल’ मॉडल

​सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के वधावन बंदरगाह (Vadhvan Port) को एक आधुनिक और विश्वस्तरीय मल्टी-मॉडल विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसे राष्ट्रीय स्तर के एक ऐसे प्रमुख प्रवेश द्वार (Gateway) के रूप में तैयार किया जाना चाहिए, जो रेल, सड़क, हवाई और जलमार्गों (इंटरमॉडल कनेक्टिविटी) से बेहतर तरीके से जुड़ा हो।

​इसके अतिरिक्त, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया। पीएम ने कहा कि यह परियोजना राज्यों के बीच आपसी सहयोग और जल संसाधनों के कुशल उपयोग का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और ड्रिप सिंचाई प्रणाली को मजबूत करने को कहा।

​सरकारी लेती-लतीफी पर जताई चिंता, लागू हुई नई समीक्षा व्यवस्था

​प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि सरकारी परियोजनाओं में देरी होने से न केवल देश के पैसे की बर्बादी होती है और लागत बढ़ती है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं में भी देरी होती है। इसलिए सभी मंत्रालयों और राज्यों को अधिक सक्रिय होकर समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना चाहिए।

​जवाबदेही होगी तय:

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि अब सरकारी स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की कल्याणकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए एक ‘नई निगरानी व्यवस्था’ लागू की गई है, जिससे परियोजनाओं की कड़ाई से मॉनिटरिंग होगी और अधिकारियों की जवाबदेही और मजबूत की जा सकेगी।

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