तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: AIADMK को झटका, पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन विजय की पार्टी ‘टीवीके’ में हुए शामिल
तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: AIADMK को झटका, पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन विजय की पार्टी ‘टीवीके’ में हुए शामिल
चेन्नई:
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में आया भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व पर्यटन मंत्री वेल्लामंडी नटराजन (Vellamandi N. Natarajan) ने एआईएडीएमके का साथ छोड़कर अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) का दामन थाम लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल दलबदल के बाद तमिलनाडु के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मध्य तमिलनाडु (तिरुचि क्षेत्र) में मजबूत जमीनी पकड़ रखने वाले नटराजन का जाना पलानीस्वामी खेमे के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
बुधवार देर रात महासचिव से की मुलाकात
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वेल्लामंडी नटराजन ने बुधवार देर रात टीवीके के महासचिव एन. आनंद से मुलाकात की और औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
टीवीके में शामिल होने के बाद नटराजन ने एआईएडीएमके के शीर्ष नेतृत्व पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा:
”मैं लंबे समय से एआईएडीएमके में रहा हूँ। अम्मा (जे. जयललिता) के निधन के बाद से ही पार्टी लगातार आंतरिक विभाजन और चुनावी हार के दौर से गुजर रही है। मैंने कई बार सुझाव दिया कि सभी धड़े और नेता एक साथ आएं और भविष्य की दिशा तय करें, लेकिन मेरी बात को अनसुना कर दिया गया। चुनाव खत्म होने के बाद भी पार्टी के भीतर की गुटबाजी और विभाजन जारी है, जो बिल्कुल ठीक नहीं है।”
नटराजन ने आगे कहा कि टीवीके ने थंथई पेरियार, सी.एन. अन्नादुरई, एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता जैसी महान विभूतियों की विचारधारा को अपनाया है, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने विजय के नेतृत्व में काम करने का फैसला किया है।
जयललिता सरकार में रहे थे मंत्री, ऐसा रहा सियासी सफर
वेल्लामंडी नटराजन तिरुचि क्षेत्र के एक बेहद कद्दावर नेता माने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है:
2016 में बने मंत्री: नटराजन 2016 के विधानसभा चुनाव में तिरुचि ईस्ट सीट से विधायक चुने गए थे और दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के मंत्रिमंडल में उन्हें पर्यटन मंत्री बनाया गया था।
ओपीएस का दिया साथ: जयललिता के निधन के बाद जब पार्टी बंटी, तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) का वफादार बनकर उनका साथ दिया।
ईपीएस खेमे में वापसी: 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब ओपीएस ने नाटकीय रूप से द्रमुक (DMK) के साथ हाथ मिला लिया, तो नटराजन वापस एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व वाले मुख्य एआईएडीएमके खेमे में लौट आए थे। हालांकि, पार्टी के अंतहीन अंदरूनी संकट से तंग आकर अब उन्होंने ‘टीवीके’ का रुख कर लिया है।
संकट में AIADMK, सांसद ने लगाया ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप
वेल्लामंडी नटराजन का टीवीके में जाना एआईएडीएमके के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि पार्टी पहले से ही बड़े पैमाने पर दलबदल का सामना कर रही है। हाल ही में एआईएडीएमके के चार मौजूदा विधायक भी पलानीस्वामी का साथ छोड़कर टीवीके में शामिल हो चुके हैं।
इस बीच, एआईएडीएमके सांसद धनपाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्षी विधायकों और नेताओं को तोड़े जाने के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई है। सांसद धनपाल ने मांग की है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI/ED) को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए, क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए बड़े पैमाने पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) और भारी वित्तीय लेनदेन किया जा रहा है।
