यूएस-ईरान तनाव: सीजफायर के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान में किए हवाई हमले, होर्मुज स्ट्रेट के पास गूंजे धमाके
यूएस-ईरान तनाव: सीजफायर के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान में किए हवाई हमले, होर्मुज स्ट्रेट के पास गूंजे धमाके
वाशिंगटन/तेहरान:
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत और नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव की खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने बुधवार रात ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हवाई हमले किए हैं। वॉशिंगटन का दावा है कि यह हमला अमेरिकी बलों और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया था।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘सीबीएस न्यूज’ ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस ‘रक्षात्मक कार्रवाई’ के दौरान अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरान की तरफ से छोड़े गए 4 आत्मघाती हमलावर ड्रोनों (One-way Attack Drones) को हवा में ही मार गिराया। इसके अलावा, बंदर अब्बास में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया गया, जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी में था।
बंदर अब्बास पोर्ट के पास तड़के गूंजे धमाके
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक, गुरुवार तड़के करीब 1:30 बजे (बुधवार रात 22:00 GMT) ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पूर्वी इलाके में तीन भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई।
धमाकों के तुरंत बाद ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) सक्रिय हो गया।
ईरानी अधिकारी फिलहाल यह जांच कर रहे हैं कि धमाकों की सटीक लोकेशन क्या थी और इससे कितना नुकसान हुआ है।
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों को ‘नपा-तुला और विशुद्ध रूप से रक्षात्मक’ बताया है ताकि दोनों देशों के बीच चल रहे युद्धविराम को बनाए रखा जा सके। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में पहले से ही नाजुक सीजफायर पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: “मिडटर्म चुनाव की कोई परवाह नहीं”
यह सैन्य कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद हुई है, जिसमें उन्होंने ईरान वार्ता को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। बुधवार को व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं कर रहे हैं।
ट्रंप के संबोधन और वार्ता की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
राजनीतिक दबाव से इनकार: ट्रंप ने कहा कि ईरान को शायद यह गलतफहमी थी कि अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि (Midterm) चुनावों का दबाव उनकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर देगा। ट्रंप ने दो टूक कहा, “उन्हें लगा कि वे मुझसे ज़्यादा इंतज़ार करवा लेंगे, लेकिन मुझे मध्यावधि चुनावों की कोई परवाह नहीं है।”
सैन्य कार्रवाई की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका फिलहाल वार्ता की मौजूदा शर्तों से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा, “वे बस किसी तरह समझौता करना चाहते हैं, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है।”
प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं: राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि यदि ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को छोड़ भी देता है, तो भी उसे आर्थिक प्रतिबंधों से कोई राहत नहीं मिलेगी। फोन इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं। किसी तरह की प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी।”
व्हाइट हाउस ने ‘ड्राफ्ट समझौते’ को बताया पूरी तरह मनगढ़ंत
इससे पहले बुधवार को ही व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया (IRIB TV) की उस रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच एक समझौता मसौदा (Draft Agreement) तैयार हो गया है।
क्या था ईरानी मीडिया का दावा?
ईरानी सरकारी चैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि इस समझौते के तहत अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेना को पीछे हटाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक पाबंदियों (Naval Blockade) को खत्म कर देगा।
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर इस रिपोर्ट को ‘पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत’ करार दिया और कहा कि ईरान द्वारा फैलाई जा रही ऐसी खबरों पर कोई भी विश्वास न करे। ताजा हमलों और ट्रंप के कड़े बयानों से साफ है कि दोनों देशों के बीच शांति बहाली की राह अभी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
