उत्तराखंड

देवप्रयाग के जंगलों में लगी भीषण आग: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंचीं लपटें, दहशत में खाली कराने पड़े हॉस्टल

देवप्रयाग के जंगलों में लगी भीषण आग: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंचीं लपटें, दहशत में खाली कराने पड़े हॉस्टल

​देवप्रयाग/पौड़ी: उत्तराखंड के जनपद पौड़ी के देवप्रयाग क्षेत्र में जंगल की एक भीषण आग ने भारी तबाही मचाई है। बाह बाजार के निकटवर्ती जंगलों से उठी आग की गगनचुंबी लपटें धीरे-धीरे रिहायशी इलाकों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुंच गईं, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी और दहशत का माहौल बन गया।

​तेज हवाओं के कारण विकराल हुई इस आग पर दमकल विभाग, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने भारी मशक्कत के बाद देर रात काबू पाया, जिसके बाद परिसर प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

​दो दिन शांत रहने के बाद दोबारा भड़की आग

​मिली जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत देवप्रयाग नगरपालिका के वार्ड संख्या चार स्थित बाह बाजार क्षेत्र में सौड़ गांव की ओर से हुई। इससे दो दिन पहले भी नृसिंहाचल पर्वत के जंगलों में भीषण आग लगी थी, जिसे विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और वन विभाग की टीम ने 4 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद बुझाया था। लेकिन सोमवार को सौड़ गांव की दिशा से आग दोबारा भड़क उठी और देखते ही देखते विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने लगी।

​दुर्गम पहाड़ी रास्ता और तेज हवा बनी बाधा; एहतियातन खाली कराए गए आवास

​पहाड़ी क्षेत्र के बेहद ढालदार और दुर्गम होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा:

​दमकल की गाड़ियां बेअसर: दमकल विभाग (Fire Brigade) की गाड़ियां मौके पर तो पहुंच गईं, लेकिन घटनास्थल की दूरी और दुर्गम चढ़ाई के कारण पानी के पाइप वहां तक नहीं पहुंच पाए, जिससे फायर फाइटिंग ऑपरेशन प्रभावित हुआ।

​हॉस्टल खाली कराए गए: जब आग की ऊंची लपटें हॉस्टल (छात्र आवास) की छतों के समानांतर उठने लगीं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से एहतियातन छात्रों और कर्मचारियों से तुरंत आवास खाली करा दिए।

​बस्ती की ओर बढ़ी आग: कुछ ही समय में आग बाह बाजार के ठीक ऊपर स्थित जंगलों को खाक करते हुए रिहायशी बस्ती की तरफ बढ़ने लगी, जिससे लोग अपने घरों को बचाने के लिए खुद पानी और मिट्टी लेकर दौड़ पड़े। वन कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग को घरों तक पहुंचने से पहले रोक लिया। हालांकि, बाह बाजार के ऊपर स्थित खेड़ा गांव चारों ओर से आग से घिर गया है, जहां ग्रामीण खुद मोर्चा संभाले हुए हैं।

​धुएं से सांस लेना दूभर, तापमान में भारी बढ़ोतरी

​इस दावानल (जंगल की आग) के कारण पूरे देवप्रयाग क्षेत्र में गहरे काले धुएं का गुबार छा गया है। हवा में फैले इस धुएं के चलते स्थानीय लोगों और छात्रों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। आग की तपिश के कारण स्थानीय तापमान में भी अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

​आबादी वाले इलाकों में घुसे गुलदार और वन्यजीव

​जंगलों के धधकने का सबसे बुरा असर बेजुबान वन्यजीवों पर पड़ा है। अपनी जान बचाने के लिए जंगल से भागकर कई जंगली जानवर और जीव-जंतु केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर और आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ रुख कर रहे हैं।

​पिछले तीन दिनों से विश्वविद्यालय परिसर के आसपास लगातार गुलदार (तेंदुआ) देखे जाने से भय का माहौल है।

​इसके अलावा, आग की चपेट में आकर झुलसे और घायल हुए कई पक्षी भी सड़कों तथा रिहायशी इलाकों में गिरते हुए देखे गए हैं।

​सुरक्षा के लिए बनेगी ठोस योजना: कुलपति

​केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने देवप्रयाग के जंगलों में लगी इस आग और परिसर को हुए खतरे का कड़ा संज्ञान लिया है। भविष्य में इस प्रकार की आकस्मिक आपदाओं से परिसर, छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित रखने के लिए कुलपति और निदेशक के बीच एक उच्चस्तरीय वार्ता हुई है। जल्द ही वन विभाग के सहयोग से परिसर की सुरक्षा के लिए एक ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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