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ईरान का बड़ा बयान: संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजने पर नहीं दी कोई सहमति, सऊदी मीडिया के दावों को नकारा

ईरान का बड़ा बयान: संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजने पर नहीं दी कोई सहमति, सऊदी मीडिया के दावों को नकारा

​तेहरान: मध्य पूर्व में जारी भारी कूटनीतिक हलचलों और अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता के बीच ईरान ने एक बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने अपने किसी भी संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को देश से बाहर भेजने पर कोई सहमति नहीं दी है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने उन सभी अंतरराष्ट्रीय व सऊदी मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि तेहरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करने के लिए तैयार हो गया है।

​सऊदी अरब के ‘अल हदाथ’ चैनल के दावों की खुली पोल

​दरअसल, सऊदी अरब के प्रमुख समाचार चैनल ‘अल हदाथ’ ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक संभावित समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत ईरान अपना यूरेनियम देश से बाहर भेजने के लिए राजी हो सकता है।

​तस्नीम समाचार एजेंसी ने अपनी विशेष जांच के बाद इस दावे को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया। एजेंसी के अनुसार:

​”अमेरिका और ईरान के बीच इस समय जिस समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे पर चर्चा चल रही है, उसमें दूर-दूर तक कहीं भी यह नहीं लिखा है कि ईरान अपने परमाणु पदार्थों को देश से बाहर भेजेगा। ईरान ने वर्तमान वार्ता में अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर कोई भी नया वादा या प्रतिबद्धता जाहिर नहीं की है।”

​ईरानी मीडिया का मानना है कि सऊदी और इजरायली मीडिया द्वारा फैलाई जा रही ऐसी खबरें असल में अमेरिका की “मनोवैज्ञानिक रणनीति” (Psychological Operations) का हिस्सा हो सकती हैं, जिसका मुख्य मकसद चल रही शांति वार्ता के माहौल को अपने पक्ष में प्रभावित करना और ईरान पर दबाव बनाना है।

​”हम पीछे हटने वाले नहीं” — ईरान की सुरक्षा परिषद

​इस पूरे विवाद और कूटनीतिक खींचतान के बीच, सोमवार को ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र ने देश के नाम एक कड़ा संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से रत्ती भर भी पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका और इजरायल के चौतरफा दबाव का डटकर सामना करने के लिए इस समय पूरे देश में अटूट एकता और मजबूत आपसी सहयोग बेहद जरूरी है।

​युद्ध खत्म करने के लिए 14 बिंदुओं वाले ‘एमओयू’ पर हो रहा है काम

​इससे पहले, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी (IRIB) को दिए एक इंटरव्यू में दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक प्रगति की जानकारी दी थी।

​14 बिंदुओं का मसौदा: प्रवक्ता ने बताया कि ईरान और अमेरिका इस समय युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक ’14-पॉइंट एमओयू’ (14-Clause MoU) को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

​अंतिम समझौते की समय सीमा: एक बार इस प्रारंभिक मसौदे पर सहमति बनने के बाद, अगले 30 से 60 दिनों के भीतर दोनों देश एक अंतिम और स्थायी समझौते तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।

​ईरान की मुख्य शर्तें: इस प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान की मुख्य मांगों में अमेरिका द्वारा समुद्री हमलों को तत्काल रोकना, ईरानी जलक्षेत्र की नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) को पूरी तरह खत्म करना और विदेशों में अवैध रूप से फ्रीज (फंसी) की गई अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जल्द से जल्द जारी करना शामिल है।

​पाकिस्तान की मध्यस्थता और 40 दिनों का संघर्ष

​गौरतलब है कि इसी साल ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था। इस युद्धविराम के बाद शांति बहाली के लिए 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की वार्ता हुई थी, हालांकि उसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था। फिलहाल दोनों देश संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए विभिन्न प्रस्तावों और शर्तों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, लेकिन परमाणु सामग्री को देश से बाहर भेजने की शर्त पर ईरान का रुख अब भी बेहद सख्त बना हुआ है।

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