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पश्चिम एशिया संकट: भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए वित्त मंत्री का ‘3F’ प्लान, MSME को बड़ी राहत का ऐलान

पश्चिम एशिया संकट: भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए वित्त मंत्री का ‘3F’ प्लान, MSME को बड़ी राहत का ऐलान

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और युद्ध के हालातों ने जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, वहीं भारत इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था को इस वैश्विक संकट से सुरक्षित रखने के लिए खास तौर पर “3F” यानी फ्यूल (Fuel-ईंधन), फर्टिलाइजर (Fertilizer-उर्वरक) और फॉरेक्स (Forex-विदेशी मुद्रा भंडार) पर फोकस कर रही है। उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि तमाम वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत और पूरी तरह स्थिर है।

​क्या है सरकार का ‘3F’ फॉर्मूला और क्यों बढ़ी चिंता?

​पीटीआई (PTI) के मुताबिक, वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव इस समय सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। इन तीन मोर्चों (3F) पर सरकार की रणनीति इस प्रकार है:

​फ्यूल (Fuel): पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती की है। इससे सरकारी खजाने को करीब 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन आम लोगों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता थी।

​फर्टिलाइजर (Fertilizer): वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें कल्पना से परे स्तर तक पहुंच चुकी हैं, जिससे निपटना एक बड़ी चुनौती है।

​फॉरेक्स (Forex) व अन्य: विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के साथ-साथ सोने की लगातार बढ़ती कीमतें भी घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।

​”डर नहीं, भरोसा पैदा करें” — नकारात्मकता फैलाने वालों को जवाब

​वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने और डर फैलाने वालों पर बिना नाम लिए तीखा निशाना साधा। उन्होंने साफ किया कि भारत के सामने खड़ी मौजूदा चुनौतियां आंतरिक नहीं, बल्कि पूरी तरह बाहरी (वैश्विक) कारणों से पैदा हुई हैं।

​”मौजूदा हालात में लोगों के बीच डर फैलाने के बजाय भरोसा पैदा करना बेहद जरूरी है। हमारी आंतरिक आर्थिक स्थिति अब भी बहुत मजबूत है और सरकार किसी भी वैश्विक हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।” – निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री

​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट का असर

​ईरान संकट और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में जारी तनाव के कारण भारत के लिए तेल और यूरिया की निर्बाध सप्लाई को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई लगातार बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है, जिसके चलते सरकार लगातार इस रूट और सप्लाई चेन पर नजर बनाए हुए है।

​MSME सेक्टर के लिए बड़ा निर्देश: 45 दिनों में होगा ₹8.1 लाख करोड़ का भुगतान

​छोटे और मझोले उद्योगों की चिंताओं को दूर करते हुए वित्त मंत्री ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि MSME सेक्टर का करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी फंसा हुआ है।

​इस संकट को दूर करने के लिए उन्होंने सभी सरकारी कंपनियों (PSUs) को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि MSME सेक्टर का बकाया भुगतान हर हाल में 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि बाजार में नकदी (Liquidity) का संकट पैदा न हो।

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