ईरान-अमेरिका डील: हॉर्मुज खोलने का प्लान फिर फिसला? आखिर बात कहां बिगड़ रही
ईरान-अमेरिका डील: हॉर्मुज खोलने का प्लान फिर फिसला? बात कहां बिगड़ रही है
वाशिंगटन, 25 मई 2026 — अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने का मुद्दा एक बार फिर विवादों में फंस गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि डील “largely negotiated” हो चुकी है और जल्द घोषणा होने वाली है, जिसमें हॉर्मुज को सभी के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन ईरान की ओर से इसे “अपूर्ण और वास्तविकता से दूर” बताया जा रहा है।
ट्रंप का दावा: डील लगभग तय, हॉर्मुज खुलेगा
ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और अन्य देशों (सऊदी अरब, UAE, पाकिस्तान आदि) के बीच समझौता बड़े पैमाने पर तैयार हो चुका है। इसमें शामिल प्रमुख बिंदु:
60 दिनों के ceasefire एक्सटेंशन
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना टोल के सभी जहाजों के लिए खोलना
अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड हटाना
कुछ ईरानी संपत्तियां अनफ्रीज करना
परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत
ट्रंप ने कहा कि समय अमेरिका के पक्ष में है और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
ईरान का रुख: हॉर्मुज हमारा नियंत्रण रहेगा
ईरान की सरकारी मीडिया (Fars News) और विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि समझौता “अपूर्ण” है। ईरान का मुख्य आग्रह:
हॉर्मुज पर ईरान का प्रबंधन और नियंत्रण बना रहेगा।
परमाणु कार्यक्रम (खासकर enriched uranium) पर अभी कोई समझौता नहीं।
अमेरिका पहले ब्लॉकेड हटाए और युद्ध समाप्त करे, परमाणु मुद्दा बाद में।
ईरान ने साफ कहा है कि हॉर्मुज खोलने का मतलब उसका नियंत्रण छोड़ना नहीं है।
कहां बिगड़ रही है बात?
वार्ता में मुख्य अड़चनें:
हॉर्मुज का नियंत्रण और टोल — अमेरिका बिना टोल और पूर्ण मुक्त पहुंच चाहता है, जबकि ईरान नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
परमाणु कार्यक्रम — अमेरिका ईरान से highly enriched uranium छोड़ने और enrichment सीमित करने की मांग कर रहा है। ईरान इसे बाद के चरण के लिए टालना चाहता है।
सैंक्शन्स राहत — ईरान पूर्ण राहत और ब्लॉकेड हटाने पर अड़ा है।
युद्ध समाप्ति — दोनों पक्ष ceasefire चाहते हैं, लेकिन शर्तें अलग-अलग।
पाकिस्तान समेत कई देश मध्यस्थता कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।
पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद युद्ध शुरू हुआ था, जिसके चलते हॉर्मुज बंद रहा। दुनिया के 20% तेल परिवहन पर इसका असर पड़ा। कई दौर की बातचीत (ओमान, पाकिस्तान आदि) के बावजूद अभी तक ब्रेकथ्रू नहीं हुआ है।
विश्लेषण: विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिम समझौता (interim MoU) संभव है, लेकिन पूर्ण डील में परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे बाधा बन सकते हैं। वैश्विक तेल बाजार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अभी स्थिति नाजुक बनी हुई है। आगे की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
