राजनीति

ममता बनर्जी की बड़ी पहल: जून के पहले हफ्ते में बुलाई जा सकती है ‘इंडिया’ गठबंधन की अहम बैठक, तमिलनाडु संकट सुलझाने पर रहेगा जोर

ममता बनर्जी की बड़ी पहल: जून के पहले हफ्ते में बुलाई जा सकती है ‘इंडिया’ गठबंधन की अहम बैठक, तमिलनाडु संकट सुलझाने पर रहेगा जोर

​नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मिली हार के बाद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन को मजबूत करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने बड़ी इच्छा जताई है कि जून के पहले हफ्ते में ही इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जानी चाहिए। ममता बनर्जी चाहती हैं कि इस बैठक में न केवल मौजूदा सहयोगी दल शामिल हों, बल्कि देश के अन्य समान विचारधारा वाले दलों को भी आमंत्रित किया जाए।

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी अब दिल्ली के मंच पर अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं और इसके लिए वह खासकर कांग्रेस के साथ मजबूत तालमेल की पक्षधर हैं।

​ममता की पहल पर सहयोगियों में असमंजस, प्रतिक्रिया का इंतजार

​ममता बनर्जी की इस अचानक आई अपील के बाद इंडिया गठबंधन के बाकी घटक दलों में अभी पूरी तरह स्थिति साफ नहीं है। जब इस बैठक को लेकर कांग्रेस के मीडिया विभाग से संपर्क किया गया, तो शुरुआत में एक नेता ने किसी भी आधिकारिक जानकारी से इनकार किया। हालांकि, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले ही पार्टी के भीतर जून में गठबंधन की बैठक आयोजित करने को लेकर अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

​दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने भी इस बैठक को लेकर अनभिज्ञता जताई है। सपा नेताओं का कहना है कि आधिकारिक तौर पर उन्हें ऐसी किसी बैठक की सूचना नहीं है, लेकिन अगर ममता बनर्जी ने सीधे अखिलेश यादव से संपर्क किया हो, तो इसकी जानकारी जल्द ही सामने आ जाएगी। चूंकि ममता बनर्जी ने यह प्रस्ताव हाल ही में रखा है, इसलिए बाकी विपक्षी दलों की औपचारिक राय आने में थोड़ा समय लग सकता है।

​राहुल गांधी का ममता को समर्थन: ‘वोट चोरी का शिकार हुईं दीदी’

​भले ही बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और टीएमसी सरकार पर जमकर हमले किए थे, लेकिन चुनाव नतीजों के तुरंत बाद दोनों नेताओं के बीच की बर्फ पिघलती दिखी। ममता बनर्जी की हार के बाद राहुल गांधी खुलकर उनके समर्थन में खड़े हुए थे।

​राहुल गांधी ने तब सोशल मीडिया पर बयान देते हुए कहा था कि ममता बनर्जी बंगाल में ‘वोट चोरी’ का शिकार हुई हैं और भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर उनकी 100 से अधिक सीटें चुरा ली हैं। राहुल ने विपक्ष को नसीहत देते हुए यह भी कहा था कि यह आपस में ‘ओछी राजनीति’ करने का वक्त नहीं है। कांग्रेस का हमेशा से यह रुख रहा है कि राज्यों की स्थानीय राजनीति को राष्ट्रीय स्तर के ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग रखा जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे केरल में कांग्रेस वामदलों के खिलाफ चुनाव लड़ती है लेकिन केंद्र में वे साथ हैं।

​तमिलनाडु में कांग्रेस-डीएमके का बिखराव और ‘टीवीके’ की एंट्री

​जून में होने वाली संभावित बैठक में इंडिया गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती तमिलनाडु से पैदा हुए संकट को सुलझाने की होगी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। वहां दो दशकों से चले आ रहे कांग्रेस और डीएमके (DMK) के रिश्ते में बड़ी दरार आ गई है।

​कांग्रेस ने चुनाव के बाद अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ हाथ मिला लिया है और वे मिलकर सरकार चला रहे हैं। कांग्रेस के इस कदम से नाराज होकर डीएमके ने संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए सीट निर्धारित करने की आधिकारिक चिट्ठी दे दी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डीएमके इस गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी या नहीं।

​ममता बनर्जी की इस नई पहल के बाद अगर विपक्षी खेमे के बड़े नेता डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को मनाने में कामयाब होते हैं, तो बात बन सकती है। इसके साथ ही, अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ को भी इंडिया गठबंधन में शामिल करने की कवायद तेज होगी। वर्तमान में टीवीके का कोई सांसद नहीं है, लेकिन अगले महीने तमिलनाडु में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में उनका एक सांसद चुनकर आ सकता है।

​निष्कर्ष: भाजपा को रोकने के लिए ‘अस्तित्व’ की लड़ाई

​फिलहाल इंडिया गठबंधन के भीतर एक अजीब सा विरोधाभास और कन्फ्यूजन की स्थिति है। क्षेत्रीय क्षत्रपों को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस का साथ भी चाहिए, लेकिन राज्यों में वे कांग्रेस को ज्यादा राजनीतिक जमीन देने से डरते भी हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस पूरे गठबंधन को जो एक चीज एकजुट रख सकती है, वह है भाजपा को रोकने की मजबूरी।

​संसद के पिछले सत्रों में आम आदमी पार्टी और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसी पार्टियां भी विपक्ष की एकजुटता बैठकों में शामिल होती रही हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी की इस नई पहल पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे बड़े दल क्या रुख अपनाते हैं और क्या जून के पहले सप्ताह में विपक्षी एकजुटता का नया स्वरूप सामने आता है।

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