सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की धूम: सियासत के इस नए ‘लाइफ साइकिल’ का बेबाक पोस्टमार्टम
सोशल मीडिया पर आज के दौर की सियासत को लेकर किया गया यह व्यंग्य (Satire) बेहद तीखा, बेबाक और जमीनी हकीकत को दर्शाता है। इसे एक संपूर्ण और धारदार पॉलिटिकल ओपिनियन आर्टिकल (पॉलिटिकल पोस्टमार्टम) के रूप में शीर्षकों के साथ नीचे व्यवस्थित किया गया है:
सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की धूम: सियासत के इस नए ‘लाइफ साइकिल’ का बेबाक पोस्टमार्टम
आज की राजनीति में मौसम वैज्ञानिकों और गिरगिटों की चर्चा तो आम है, जो हवा का रुख देखकर पल भर में रंग बदल लेते हैं। लेकिन अगर समकालीन सियासत को बहुत बारीकी से समझा जाए, तो यह गिरगिट से कहीं आगे बढ़कर ‘कॉकरोच की लाइफ साइकिल’ (जीवन चक्र) जैसी नजर आती है।
इतिहास गवाह है कि कॉकरोच के 32 करोड़ साल पुराने जीवाश्म मिल चुके हैं—यानी डायनासोर आए और चले गए, हिमयुग बीत गया, लेकिन यह जीव हर तरह के माहौल में खुद को ढालकर जिंदा रहा। इस समय देश में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया पर एक टर्म खूब ट्रेंड कर रहा है। दरअसल, यह काल्पनिक नाम मौजूदा राजनीतिक दलों के चरित्र पर एक करारा कटाक्ष है। जनता इन्हें चाहे जितना नापसंद करे, ये व्यवस्था में कितनी भी वैचारिक गंदगी फैलाएं, इन्हें सत्ता के सिस्टम से खत्म करना नामुमकिन सा लगता है।
आइए, इस ‘पार्टी’ के जीवन चक्र के जरिए आज के पॉलिटिकल माहौल का एक इंसानी पोस्टमार्टम करते हैं।
चरण 1: ऊथेका (अंडे का आवरण) — बंद कमरों की डील्स और टिकटों का गर्भकाल
कॉकरोच के जीवन की शुरुआत ‘ऊथेका’ से होती है। यह एक बेहद सख्त सुरक्षा कवच होता है, जिसके भीतर करीब 50 अंडे सुरक्षित पल रहे होते हैं। बाहर के किसी खतरे का इस पर असर नहीं होता।
पॉलिटिकल कनेक्शन: राजनीति के चश्मे से देखें तो यह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का वह दौर है जब बंद कमरों में चुनाव की गुप्त रणनीतियां बनती हैं, गठबंधन के सौदे होते हैं और टिकटों का बंटवारा किया जाता है। बाहर से देखने पर यह आवरण पूरी तरह शांत और बंद दिखता है, लेकिन इसके भीतर सत्ता हथियाने की छटपटाहट में दर्जनों ‘भावी नेता’ पल रहे होते हैं। यह सख्त कवच इन नेताओं को तब तक बाहरी खतरों (जनता के विरोध या मीडिया के तीखे सवालों) से बचाकर रखता है, जब तक कि सही माहौल यानी ‘चुनाव’ न आ जाए।
चरण 2: निम्फ (अप्सरा) — केंचुल बदलती विचारधारा और नए नवेले नेता
जब अंडे से नन्हा ‘निम्फ’ बाहर आता है, तो वह वयस्क बनने से पहले कई बार अपनी त्वचा (केंचुल) बदलता है। हर बार जब वह त्वचा उतारता है, तो उसका शरीर एकदम सफेद और साफ-सुथरा दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे उसका बाहरी कवच फिर से कठोर और गहरे रंग का होने लगता है।
पॉलिटिकल कनेक्शन: पार्टी में शामिल होने वाले नए चेहरे या ऐन वक्त पर पाला बदलकर आए नेता ठीक इसी ‘निम्फ’ अवस्था में होते हैं। शुरुआत में ये बड़े मासूम और विचारधारा के प्रति एकदम ‘सफेद और साफ-सुथरे’ होने का दावा करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे सियासी माहौल बदलता है और उन पर जांच एजेंसियों या चुनावी हार का दबाव बनता है, ये अपनी पुरानी वैचारिक त्वचा को उतार फेंकते हैं। राजनीति का यह केंचुल बदलना इन्हें और क्रूर, कठोर और पक्का राजनेता बनाता जाता है। जैसे ही इनके ‘पंख’ (पावर और पैसा) निकल आते हैं, ये वयस्क बनकर सत्ता के आसमान में उड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।
चरण 3: वयस्क — हर गंदगी को पचाने वाले सर्वाहारी राजनेता
एक वयस्क कॉकरोच की असली पहचान उसके पंख और उसका ‘सर्वाहारी’ होना है। उसे खाने में कुछ भी दे दो—बासी खाना हो, कचरा हो या कागज के टुकड़े—वह सब कुछ हजम कर जाता है। एक मादा कॉकरोच अपने जीवनकाल में 300 से 400 बच्चों को जन्म दे सकती है।
पॉलिटिकल कनेक्शन: इस पार्टी के वयस्क नेता आज के दौर के सबसे खतरनाक खिलाड़ी हैं। इन्हें किसी सिद्धांत, देशहित या नैतिकता की भूख नहीं होती; ये पूरी तरह सर्वाहारी हैं। बड़े-बड़े घोटाले हों, रिसॉर्ट पॉलिटिक्स हो, या जनता के टैक्स का पैसा—ये सब कुछ डकार जाते हैं। इनका कोई एक निश्चित जीवनकाल नहीं होता; कुछ चुनावी लहर में आते हैं और दो महीने में गायब हो जाते हैं, जबकि कुछ ‘अमर’ राजनेता दो-दो दशक तक सत्ता के शीर्ष पर टिके रहते हैं। रही बात वंशवाद और भाई-भतीजावाद की, तो ये अपने जीवनकाल में सैकड़ों ऐसे चेले-चपाटे और उत्तराधिकारी (300-400 बच्चे) पैदा कर देते हैं, जो इस गंदी व्यवस्था को आगे बढ़ा सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले राजनीतिक प्रश्न (Political FAQs)
प्रश्न 1: इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता आमतौर पर कहां पाए जाते हैं?
उत्तर: इन्हें ढूंढने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। संसद और विधानसभाओं से लेकर नगर निगम के गलियारों, सरकारी विभागों की दरारों, मलाईदार मंत्रालयों के कोनों और टेंडरों की फाइलों के बीच ये सबसे ज्यादा फलते-फूलते पाए जाते हैं। जहां भी थोड़ा अंधेरा और गंदी व्यवस्था होगी, ये वहां मौजूद मिलेंगे।
प्रश्न 2: क्या इस पार्टी के नेता वाकई उड़ सकते हैं?
उत्तर: यह इनकी ‘प्रजाति’ और सत्ता के रसूख पर निर्भर करता है। कुछ छोटे स्तर के नेता सिर्फ एक पार्टी से दूसरी पार्टी में थोड़ी दूर तक ही ‘ग्लाइड’ (कूद-फांद) कर पाते हैं, जबकि भारी-भरकम और कद्दावर नेता सीधे उड़कर दिल्ली दरबार या ऊंचे संवैधानिक पदों पर लैंड कर जाते हैं।
प्रश्न 3: क्या ये नेता आम इंसानों को काट सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल! चूंकि ये स्वभाव से सर्वाहारी हैं और इनका पेट कभी नहीं भरता, इसलिए ये सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन महंगाई, भ्रष्टाचार, झूठे वादों और ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ (नीतिगत अपंगता) के जरिए आम इंसान की जेब और अधिकारों को हर दिन काटते हैं।
निष्कर्ष:
सच तो यही है कि कॉकरोच को जीवित रहने के लिए गर्म, अंधेरा, गंदा और नम माहौल ही पसंद आता है; हमारी राजनीति का माहौल भी आज कुछ ऐसा ही हो चुका है। कुछ लोग इनकी तुलना दीमकों से करते हैं, लेकिन दीमक सिर्फ लकड़ी (सिस्टम) को खाती है, जबकि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता सर्वाहारी हैं—यह सिस्टम, समाज, भाईचारा और जनता का भरोसा, सब कुछ खा जाते हैं। जनता चाहे जितनी बार बदलाव का कीटनाशक छिड़के, ये हर बार एक नए रूप में जिंदा बच निकलते हैं।
