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​भारत की पहली E100 फ्लेक्स-फ्यूल कार लाने की तैयारी में Maruti Suzuki, विश्व पर्यावरण दिवस पर हो सकती है पेश

​भारत की पहली E100 फ्लेक्स-फ्यूल कार लाने की तैयारी में Maruti Suzuki, विश्व पर्यावरण दिवस पर हो सकती है पेश

​नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। कंपनी आगामी विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) से चलने वाली गाड़ी को प्रदर्शित या पेश कर सकती है। इस कदम के साथ ही कंपनी का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ ईंधन (Eco-friendly fuel) विकल्पों की तरफ बढ़ने की जरूरत पर जोर देना है।

​यह आगामी गाड़ी देश की पहली ऐसी 4-व्हीलर होगी, जो पारंपरिक पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल के हाई-ब्लेंड्स यानी E100 (100% इथेनॉल) तक पर पूरी तरह चलने में सक्षम होगी।

​भारत की पहली E100 फोर-व्हीलर गाड़ी

​वर्तमान में भारतीय बाजार में एक भी ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल 4-व्हीलर गाड़ी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है जो शत-प्रतिशत इथेनॉल पर चल सके। मारुति सुजुकी की यह पेशकश इस सेगमेंट में देश की पहली कार होगी। शुद्ध इथेनॉल (E100) पर सुचारू रूप से चलने के लिए इस गाड़ी के मैकेनिक्स में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसमें खास तौर पर तैयार किया गया फ्यूल स्टोरेज, एडवांस डिलीवरी सिस्टम और एक विशेष इग्निशन सिस्टम दिया जाएगा।

​E100 के अनुकूल बनाने के लिए किए गए खास तकनीकी बदलाव

​इथेनॉल की प्रकृति पारंपरिक पेट्रोल से काफी अलग होती है। इसमें हवा से नमी (Moisture) को सोखने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। यही वजह है कि जब ईंधन में इथेनॉल की मात्रा 100% तक बढ़ाई जाती है, तो इंजन पार्ट्स में जंग या खराबी आने का खतरा बढ़ जाता है।

​तकनीकी सुधार: मारुति सुजुकी ने अपने पुराने E85 प्रोटोटाइप के मुकाबले इस नई गाड़ी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसके इंजन के अंदरूनी हिस्सों और फ्यूल पाइपलाइनों को ऐसे मटेरियल से बनाया गया है, जिन पर इथेनॉल और नमी का कोई बुरा असर न पड़े।

​देश को मिलेंगे ये बड़े फायदे

​ईंधन में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के आने से भारत को कई स्तरों पर फायदा होगा:

​कम लागत और कम प्रदूषण: इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है, जिससे टेलपाइप उत्सर्जन (प्रदूषण) में भारी कमी आएगी।

​कच्चे तेल के आयात पर घटेगी निर्भरता: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के बीच, स्वदेशी इथेनॉल का इस्तेमाल भारत के महंगे तेल आयात बिल को काफी कम कर देगा।

​किसानों को लाभ: इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से होता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और किसानों की आय बढ़ेगी।

​ऑटो सेक्टर में बढ़ रही है फ्लेक्स-फ्यूल की होड़

​फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन मोबिलिटी को लेकर केवल मारुति ही नहीं, बल्कि पूरी ऑटो इंडस्ट्री काफी गंभीर है। Toyota, TATA, Mahindra और Suzuki समेत कुल 12 कंपनियां पहले ही अलग-अलग मंचों पर अपनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की तकनीक को प्रदर्शित कर चुकी हैं। इसके अलावा, टू-व्हीलर सेगमेंट में Honda और Suzuki जैसी कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल से चलने वाले स्कूटर्स और बाइक्स भी सामने ला चुकी हैं।

​वर्तमान में भारत सरकार ने E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रण) को पूरे देश में मानकीकृत (Standardize) कर दिया है। इसके साथ ही ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने भविष्य की तैयारी करते हुए E22, E25, E27 और E30 ईंधन के लिए भी स्पेसिफिकेशंस जारी कर दिए हैं। ऐसे में मारुति सुजुकी की E100 गाड़ी का आना भारत के ‘ग्रीन फ्यूल मिशन’ के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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