‘ड्राय स्टेट’ गुजरात में शराबबंदी पर रार: BJP सांसद मनसुख वसावा की चिट्ठी से मचा सियासी घमासान, कांग्रेस हमलावर
‘ड्राय स्टेट’ गुजरात में शराबबंदी पर रार: BJP सांसद मनसुख वसावा की चिट्ठी से मचा सियासी घमासान, कांग्रेस हमलावर
गांधीनगर: पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य गुजरात में अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। खास बात यह है कि इस बार सरकार को घेरने वाला कोई विपक्षी नेता नहीं, बल्कि खुद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही एक वरिष्ठ और कद्दावर सांसद हैं। भरूच से बीजेपी सांसद मनसुख वसावा (Mansukh Vasava) द्वारा राज्य के गृह मंत्री को लिखी गई एक गोपनीय और हाथ से लिखी चिट्ठी के लीक होने के बाद गुजरात की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है।
1. बीजेपी सांसद का गंभीर दावा: पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है नेटवर्क
सांसद मनसुख वसावा ने गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी को हाथ से लिखा एक बेहद कड़ा पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने जो दावे किए हैं, उसने पूरी सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
संगठित नेटवर्क: सांसद का दावा है कि नर्मदा जिले में बड़े पैमाने पर एक संगठित अवैध शराब और जुए का नेटवर्क सक्रिय है।
पुलिस का संरक्षण: उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह पूरा अवैध धंधा स्थानीय पुलिस अधिकारियों के प्रत्यक्ष संरक्षण (Protection) और मिलीभगत से फल-फूल रहा है।
पार्टी की बदनामी: उन्होंने पत्र में दुख जताते हुए कहा कि पुलिस और शराब माफिया के इस गठजोड़ की वजह से जमीन पर पार्टी की छवि खराब हो रही है और भारी बदनामी झेलनी पड़ रही है।
2. महाराष्ट्र बॉर्डर से हो रही केमिकल वाली अंग्रेजी शराब की तस्करी
मनसुख वसावा ने पत्र में तस्करी के तौर-तरीकों का भी खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
बॉर्डर पार से तस्करी: भारी मात्रा में केमिकल मिलावट वाली अंग्रेजी शराब को पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की सीमा (Border) पार कराकर गुजरात के नर्मदा जिले में लाया जा रहा है।
चेकपोस्ट पर मिलीभगत: यह पूरा ऑपरेशन एक सोचे-समझे अंडरग्राउंड नेटवर्क की तरह काम कर रहा है। शराब से लदी गाड़ियां कई पुलिस चौकियों और चेकपोस्ट से बिना किसी रोक-टोक के पार हो रही हैं।
सख्त एक्शन की मांग: सांसद ने नर्मदा पुलिस विभाग के थाना अधिकारियों (SHOs) और स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ तत्काल और कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
3. “युवा हो रहे बर्बाद” — सरकार से भावुक अपील
अपने पत्र के अंत में बीजेपी सांसद ने सामाजिक सरोकार का मुद्दा उठाते हुए सरकार से दखल देने की मांग की। उन्होंने लिखा कि इस बेखौफ और अनियंत्रित अवैध शराब की बिक्री के कारण स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण युवा नशे की लत का शिकार हो रहे हैं और उनका भविष्य बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से इस माफिया राज को खत्म करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है।
4. बैठे-बिठाए मिला मुद्दा, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
बीजेपी सांसद के इस पत्र ने विपक्ष के हाथ में एक बड़ा हथियार थमा दिया है। कांग्रेस ने इस चिट्ठी को सरकार की विफलता का सबसे बड़ा ‘आधिकारिक सबूत’ करार दिया है।
कांग्रेस नेता मनीष दोषी का पलटवार:
“सांसद मनसुख भाई वसावा ने खुद अपनी ही सरकार की पोल खोलते हुए गुजरात में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जो राज्य कागजों पर ‘ड्राय स्टेट’ (शराबबंदी वाला राज्य) है, वह असल में अवैध शराब और मादक पदार्थों की बिक्री का केंद्र बन चुका है। ड्रग्स और शराब गुजरात के युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाट रहे हैं, और राज्य की बीजेपी सरकार इस माफिया को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।”
फिलहाल इस पत्र के सामने आने के बाद गुजरात के गृह विभाग में हड़कंप है और नर्मदा जिला पुलिस प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है। देखना होगा कि अपनी ही पार्टी के सांसद के इन गंभीर आरोपों पर सरकार क्या कदम उठाती है।
