बंगाल में बकरीद की छुट्टी में बड़ा बदलाव: ममता सरकार का ‘2 दिन का अवकाश’ आदेश रद्द, अब सिर्फ 1 दिन की रहेगी छुट्टी
बंगाल में बकरीद की छुट्टी में बड़ा बदलाव: ममता सरकार का ‘2 दिन का अवकाश’ आदेश रद्द, अब सिर्फ 1 दिन की रहेगी छुट्टी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में इस बार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के त्योहार पर मिलने वाली सरकारी छुट्टियों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के एक बड़े फैसले को पलट दिया है। पहले जहां राज्य में बकरीद के मौके पर दो दिनों के सरकारी अवकाश का प्रावधान था, वहीं अब इसे घटाकर सिर्फ एक दिन कर दिया गया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, इस साल बकरीद पर केवल 28 मई 2026 (गुरुवार) को ही सरकारी छुट्टी रहेगी, जबकि 29 मई को सभी सरकारी दफ्तर, स्कूल और संस्थान आम दिनों की तरह सामान्य रूप से खुले रहेंगे।
1. नई शुभेंदु सरकार ने बदला ममता बनर्जी का पुराना आदेश
पश्चिम बंगाल की बागडोर संभालने के बाद नई शुभेंदु अधिकारी सरकार लगातार कई प्रशासनिक फैसलों में बदलाव कर रही है। इसी कड़ी में ममता बनर्जी सरकार के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया गया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के इस बड़े पर्व पर दो दिनों की छुट्टी दी जाती थी। सरकार के इस कदम से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
2. कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धार्मिक आधार पर छूट की मांग खारिज
बकरीद से ठीक पहले पशुओं की कुर्बानी को लेकर दायर की गई कई याचिकाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई पूरी करते हुए उन्हें निपटा दिया है। अदालत का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
याचिका खारिज: कोर्ट ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950’ के तहत धार्मिक आधार पर विशेष छूट देने और भैंस, बैल समेत अन्य प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी की अनुमति देने वाली मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया।
सरकार को निर्देश: हालांकि, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को यह लचीलापन दिया है कि वह आगामी 24 घंटे के भीतर परिस्थितियों की समीक्षा करे और यह तय करे कि कानून व्यवस्था या धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए किसी प्रकार की अस्थायी छूट देना आवश्यक है या नहीं।
3. बिना ‘हेल्थ सर्टिफिकेट’ नहीं होगी कुर्बानी, खुले में वध पर रोक
हाई कोर्ट के रुख के बाद बंगाल सरकार ने एक सख्त दिशा-निर्देश (Advisory) और अधिसूचना जारी की है:
स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य: अब राज्य में बिना आधिकारिक ‘स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ (Health Certificate) प्राप्त किए किसी भी पशु का वध या कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी।
सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदी: खुले और सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: सरकार ने साफ किया है कि यदि इन नियमों और निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
4. हुमायूं कबीर ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
सरकार और कोर्ट के इन फैसलों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:
”दुनिया भर के मुसलमान पिछले 1400 वर्षों से कुर्बानी देते आ रहे हैं। यह कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि कुरान का निर्देश है और इसका गहरा धार्मिक महत्व है। जब केंद्र सरकार दिल्ली से भैंस और अन्य मवेशियों के मांस के आयात-निर्यात (Export) की अनुमति देती है, तो फिर यहां त्योहार पर इस तरह की रोक लगाने का क्या औचित्य है? अगर प्रतिबंध लगाना ही है, तो सरकार को इससे जुड़े सभी कमर्शियल लाइसेंस भी रद्द कर देने चाहिए।”
देशभर में इस साल बकरीद का पर्व 28 मई को मनाया जाना तय हुआ है, लेकिन बंगाल में छुट्टियों में कटौती और पशु वध को लेकर बने सख्त नियमों ने त्योहार से पहले सूबे का सियासी पारा जरूर बढ़ा दिया है।
