उत्तराखंड

उत्तराखंड में वनाग्नि पर हाईटेक प्रहार: ड्रोन कैमरे में कैद हुआ जंगल में आग लगाने वाला आरोपी, वन विभाग ने दबोचा

उत्तराखंड में वनाग्नि पर हाईटेक प्रहार: ड्रोन कैमरे में कैद हुआ जंगल में आग लगाने वाला आरोपी, वन विभाग ने दबोचा

​रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के जंगलों में हर साल लगने वाली भीषण आग (वनाग्नि) की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग अब पूरी तरह हाईटेक हो चुका है। इसी आधुनिक तकनीक की मदद से रुद्रप्रयाग जिले के जखोली रेंज में वन विभाग की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ड्रोन के जरिए की जा रही निगरानी (मॉनिटरिंग) के दौरान एक व्यक्ति को जंगल में आग सुलगाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

​डीएफओ खुद कर रहे ड्रोन मॉनिटरिंग, रात के अंधेरे का फायदा उठाकर भागा था आरोपी

​वनाग्नि की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) खुद ड्रोन कैमरों के माध्यम से संवेदनशील वन क्षेत्रों की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।

​20 मई की घटना: जखोली रेंज के तैला कक्ष संख्या 7 में ड्रोन कैमरे से मॉनिटरिंग की जा रही थी। इसी दौरान कैमरे में एक व्यक्ति को साफ तौर पर जंगल में आग लगाते हुए देखा गया।

​टीम की छापेमारी: ड्रोन से पुख्ता जानकारी मिलते ही वन दरोगा बड़मा अनुभाग और तैला बीट की टीम बिना वक्त गंवाए तत्काल मौके पर पहुंच गई। हालांकि, वन कर्मियों को अपने पास आता देख आरोपी उस समय रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहा।

​ग्रामीणों से पूछताछ के बाद अगले ही दिन दबोचा गया आरोपी

​भले ही आरोपी रात में भाग निकला था, लेकिन ड्रोन कैमरों में उसका चेहरा और हरकतें कैद हो चुकी थीं। वन विभाग की टीम ने अगले ही दिन 21 मई को घटनास्थल का दोबारा गहन निरीक्षण किया और आसपास के स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ की।

​ग्रामीणों से मिली जानकारी और ड्रोन फुटेज के मिलान के बाद यह साफ हो गया कि आग लगाने की इस घटना को जखोली तहसील के पंद्रोला कुमड़ी निवासी त्रिलोक सिंह जगवान ने अंजाम दिया था। वन विभाग की टीम ने जब त्रिलोक सिंह को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की, तो उसने वन क्षेत्र में जानबूझकर आग लगाने के जुर्म को स्वीकार कर लिया।

​इन कड़े कानूनों और धाराओं के तहत दर्ज हुआ मुकदमा

​आरोपी द्वारा जुर्म कबूल किए जाने के बाद वन विभाग ने उसे विधिक प्रक्रिया के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित कड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है:

​अधिनियम और धाराएं: भारतीय वन अधिनियम 1927 (संशोधित 2001) की धारा 26(ख) एवं 26(ग) के अंतर्गत वन अपराध दर्ज।

​सजा का प्रावधान: इन गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर भारी आर्थिक दंड (जुर्माने) के साथ-साथ अधिकतम दो साल तक के कड़े कारावास (जेल) का प्रावधान है।

​अब तक 13 गिरफ्तारियां; डीएफओ बोले— ‘आग लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा’

​डीएफओ रजत सुमन ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि वनाग्नि से हमारी प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग का मुख्य उद्देश्य जनसहयोग से वनाग्नि की घटनाओं को रोकना और लोगों को जागरूक करना है। इसी सिलसिले में विभाग द्वारा 5 मई से 11 मई 2026 तक ‘वन अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ मनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया गया था।

​विभाग ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि वर्तमान फायर सीजन में अब तक जंगलों में आग फैलाने के कुल 13 मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि अब ड्रोन तकनीक के आ जाने से दूरदराज के संवेदनशील जंगलों में भी उपद्रवियों की पहचान करना और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाना वन विभाग के लिए बेहद आसान और प्रभावी हो गया है।

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