ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे: राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सख्त चेतावनी, पोलैंड में तैनात होंगे 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक
ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे: राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सख्त चेतावनी, पोलैंड में तैनात होंगे 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक
वाशिंगटन / मियामी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बेहद कड़े बयान जारी किए हैं। अमेरिकी नेतृत्व ने एक तरफ जहां ईरान को परमाणु हथियार न बनाने देने की सख्त हिदायत दी है, वहीं दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल की निर्बाध सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करने की बात कही है। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने पोलैंड में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ाने का एक और बड़ा सैन्य फैसला लिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘टॉल सिस्टम’ बिल्कुल मंजूर नहीं: मार्को रुबियो
भारत रवाना होने से पहले मियामी के होमस्टेड एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टैक्स या टॉल (शुल्क) लगाने के ईरानी प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की।
प्रस्ताव को वैश्विक समर्थन: रुबियो ने कहा कि अमेरिका, बहरीन द्वारा प्रायोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जो ईरान के ऐसे किसी भी कदम का विरोध करता है। इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के इतिहास में अब तक के सबसे ज्यादा (100 से अधिक देशों) सह-प्रायोजकों का समर्थन मिला है।
कूटनीति को झटका: रुबियो ने दोटूक कहा, “दुनिया में कोई भी टॉल सिस्टम के पक्ष में नहीं है। अगर ईरान इस दिशा में आगे बढ़ता रहा, तो किसी कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना नामुमकिन हो जाएगा।”
’स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हमारा पूरा नियंत्रण, वहां स्टील की दीवार है’ — डोनाल्ड ट्रंप
व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की ताकत का हवाला देते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के कारण वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का ‘पूरा नियंत्रण’ है और उनकी मंजूरी के बिना कोई भी संदिग्ध जहाज वहां से गुजर नहीं सकता। ट्रंप ने इस सुरक्षा घेरे को ‘स्टील की दीवार’ जैसा बताया।
ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया, “हमने उनकी नौसेना और एयरफोर्स को पूरी तरह खत्म कर दिया है, और उनकी ज्यादातर मिसाइल क्षमता भी अब ध्वस्त हो चुकी है।”
परमाणु युद्ध का खतरा: राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर ऐसा हुआ तो मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है, जिसका सीधा असर अमेरिका और यूरोप तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत के विकल्प के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर ‘बड़ी सैन्य कार्रवाई’ के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
भारत को जितनी चाहिए उतनी ऊर्जा बेचेगा अमेरिका: बेहतरीन साझेदार बताया
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी बातचीत में भारत का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और तेल सप्लाई को लेकर पैदा हुई चिंताओं पर बात की।
रुबियो ने भारत को अमेरिका का ‘बेहतरीन सहयोगी और साझेदार’ बताते हुए कहा:
”हम भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे जितनी चाहिए उतनी ऊर्जा (तेल और गैस) बेचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मेरी आगामी भारत यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके साथ ही मैं क्वाड (Quad) समूह की महत्वपूर्ण बैठकों में भी हिस्सा लूंगा।”
पोलैंड में भेजे जाएंगे 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक
एक अन्य बड़े रणनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप में अमेरिकी सेना की उपस्थिति को मजबूत करने की घोषणा की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा:
”पोलैंड के नए राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी की शानदार जीत और उनके साथ हमारे बेहतरीन द्विपक्षीय रिश्तों को देखते हुए, मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अमेरिका पोलैंड में अतिरिक्त 5,000 सैनिक भेजेगा। मुझे राष्ट्रपति नवरोकी का समर्थन करने पर गर्व है।”
पेंटागन के फैसलों में विरोधाभास: राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि महज एक हफ्ते पहले ही पेंटागन ने पोलैंड में 4,000 से अधिक सैनिकों की नियोजित तैनाती को अचानक टाल दिया था। अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ क्रिस्टोफर लानेव ने कांग्रेस की सुनवाई में बताया था कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के दफ्तर से मिले निर्देशों के बाद ‘दूसरी आर्म्ड ब्रिगेड कॉम्बैट टीम’ की तैनाती को रोक दिया गया था, जबकि उनका सैन्य सामान रास्ते में था। अब राष्ट्रपति ने सीधे हस्तक्षेप कर सैनिकों की संख्या को और बढ़ाकर भेजने का फैसला किया है।
यूरोप में वर्तमान सैन्य स्थिति:
इस समय पूरे यूरोप में करीब 80,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
इनमें से लगभग 10,000 सैनिक अकेले पोलैंड में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं, जिसमें अब 5,000 सैनिक और जुड़ जाएंगे।
इससे पहले पेंटागन ने अगले 6 से 12 महीनों में जर्मनी से करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की भी घोषणा की थी।
