बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का कहर: अब तक 488 बच्चों की मौत, यूनिसेफ ने कहा— ‘हमने बार-बार चेताया था, पर नहीं दिए गए वैक्सीन ऑर्डर’
बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का कहर: अब तक 488 बच्चों की मौत, यूनिसेफ ने कहा— ‘हमने बार-बार चेताया था, पर नहीं दिए गए वैक्सीन ऑर्डर’
ढाका: पड़ोसी देश बांग्लादेश में खसरे (Measles) का प्रकोप बेहद भयावह रूप लेता जा रहा है। गुरुवार सुबह तक बीते 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण सात और बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद 15 मार्च से अब तक जान गंवाने वाले बच्चों की कुल संख्या बढ़कर 488 पहुंच गई है।
बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, हालिया मौतों में चार बच्चों की मौत को खसरे से संदिग्ध माना गया है, जबकि तीन मामलों की प्रयोगशाला (लैब) जांच में पुष्टि हो चुकी है। ताजा मौतों में सबसे अधिक मामले चिटगांव (Chittagong) संभाग से सामने आए हैं। देश में महामारी की इस स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संक्रमितों का आंकड़ा 59 हजार के पार, अस्पतालों में भारी भीड़
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश में खसरे के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है:
संदिग्ध और पुष्ट मामले: 15 मार्च से अब तक देश में खसरे के कारण 405 संदिग्ध और 83 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं। बीते 24 घंटों में 1,423 नए संदिग्ध मामले सामने आने के बाद कुल संदिग्ध संक्रमितों की संख्या 59,279 हो गई है। वहीं, 208 नए पुष्ट मामलों के साथ कुल कंफर्म मरीजों की संख्या 8,275 तक पहुंच गई है।
अस्पतालों की स्थिति: रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 46,407 संदिग्ध मरीजों को गंभीर स्थिति के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 42,336 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
यूनिसेफ का बड़ा खुलासा: ‘मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने चेतावनियों को किया नजरअंदाज’
इस बड़े स्वास्थ्य संकट के बीच, अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ (UNICEF) ने एक सनसनीखेज दावा किया है। यूनिसेफ ने कहा कि उसने बांग्लादेश की पूर्व अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे थे, को देश में वैक्सीन (टीकों) की भारी कमी को लेकर कई बार लिखित और मौखिक रूप से आगाह किया था, लेकिन सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए।
ढाका में आयोजित एक प्रेस वार्ता में यूनिसेफ की बांग्लादेश प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने कहा:
”हम साल 2024 से ही सरकार को लगातार चेतावनी दे रहे थे कि टीकों की कमी देश में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। हमने साल 2024 से 2025 और फिर 2026 तक स्वास्थ्य मंत्रालय को पांच से छह आधिकारिक पत्र भेजे थे और अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान इस गंभीर मुद्दे पर करीब 10 उच्च स्तरीय बैठकों में चिंता जताई थी, लेकिन इसके बावजूद वैक्सीन के ऑर्डर नहीं दिए गए।”
वर्तमान सरकार ने शुरू की जांच, यूनिसेफ देगा सबूत
राना फ्लावर्स ने आगे बताया कि केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि यूनिसेफ के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टेड चाइबन ने भी पिछले साल अगस्त में अपने बांग्लादेश दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ हुई बैठक में इस वैक्सीन संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
देश में खसरे के इस जानलेवा प्रकोप और वैक्सीन की कमी को लेकर वर्तमान बीएनपी (BNP) समर्थित सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। यूनिसेफ ने स्पष्ट किया है कि वह इस लापरवाही की जांच में सरकार को सभी आवश्यक दस्तावेज, पत्राचार और सबूत उपलब्ध कराकर पूरा सहयोग करेगा ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
