पाकिस्तान के ‘वॉटर विक्टिम कार्ड’ की खुली पोल: अपनी नाकामी छुपाने के लिए UN पहुंचा इस्लामाबाद; भारत आज भी बुझा रहा है प्यास
सिंधु जल समझौते (IWT) को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान के दावों की हवा निकल गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों की प्रतिष्ठित वेबसाइट ‘यूरेशिया रिव्यू’ की एक विस्तृत रिपोर्ट ने आंकड़ों के साथ पाकिस्तान के उस ‘झूठे नैरेटिव’ का पर्दाफाश किया है, जिसके तहत वह अपनी जल किल्लत के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता रहा है।
पाकिस्तान के ‘वॉटर विक्टिम कार्ड’ की खुली पोल: अपनी नाकामी छुपाने के लिए UN पहुंचा इस्लामाबाद; भारत आज भी बुझा रहा है प्यास
नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को व्यावहारिक तौर पर ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके बावजूद, भारत ने इंसानियत और अपने बड़प्पन के नाते पाकिस्तान को जाने वाले पानी पर कोई रोक नहीं लगाई है।
हकीकत तो यह है कि समझौते के तहत जिन तीन पूर्वी नदियों (सतलुज, ब्यास और रावी) के पानी पर पूरी तरह भारत का संप्रभु अधिकार है, उसका भी करीब 5 से 6 फीसदी हिस्सा भारत में बुनियादी ढांचे और पर्याप्त स्टोरेज (भंडारण) की कमी के कारण आज भी बहकर पाकिस्तान ही जा रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर लगातार भारत को बदनाम करने की साजिशों में जुटा है।
’भेड़िया आया, भेड़िया आया’ की तर्ज पर फैलाया जा रहा झूठ
’यूरेशिया रिव्यू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इस पूरे मामले में सिर्फ ‘भेड़िया आया, भेड़िया आया’ की तर्ज पर झूठा शोर मचा रहा है। यही वजह है कि जब पाकिस्तान ने इस समझौते को रोकने पर वैश्विक मंचों पर हाय-तौबा मचाई और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत के बांधों को बम से उड़ाने की गीदड़भभकी दी, तो दुनिया के किसी भी देश ने उनके इस गैर-जिम्मेदाराना बयान को गंभीरता से नहीं लिया।
खुद की बदहाली और प्रशासनिक नाकामी छिपाने की कोशिश
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस्लामाबाद दुनिया के सामने यह झूठा भ्रम पैदा करना चाहता है कि उसकी पानी की किल्लत के लिए भारत जिम्मेदार है। जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है:
एक दशक पहले मिली थी चेतावनी: वैश्विक जल उपलब्धता पर नजर रखने वाली तमाम बड़ी संस्थाओं ने 10 साल पहले ही चेताया था कि अगर पाकिस्तानी सरकार ने जल प्रबंधन पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो साल 2025-26 तक देश में पानी का भयानक संकट खड़ा हो जाएगा।
सिर्फ 30 दिनों का बैकअप: पाकिस्तान अपनी प्रशासनिक नाकामी के चलते आज उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां उसके पास केवल 30 दिनों की वॉटर स्टोरेज क्षमता बची है। इतने दशकों में अपनी भंडारण क्षमता न बढ़ा पाना पूरी तरह से इस्लामाबाद की नीतिगत विफलता है।
UNSC में सहानुभूति बटोरने का दांव भी पड़ा उलटा
चारों तरफ से घिरने के बाद पाकिस्तान ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाया है। उसने गुहार लगाई है कि नई दिल्ली की ओर से सिंधु जल समझौते को सस्पेंड करने से क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। वैश्विक सहानुभूति बटोरने के लिए पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास अब केवल 90 दिनों का पानी बचा है।
उप-प्रधानमंत्री के दस्तखत ने खोली पोल
पाकिस्तान के इस दावे की पोल खुद उसके विरोधाभासी और डरपोक रवैये ने खोल दी। रिपोर्ट में एक बड़ा सवाल उठाया गया है कि अगर स्थिति इतनी ही गंभीर, डरावनी और ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ जैसी थी, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजी गई इस बेहद महत्वपूर्ण चिट्ठी पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बजाय वहां के उप-प्रधानमंत्री ने हस्ताक्षर क्यों किए? यह दिखाता है कि पाकिस्तान खुद अपने दावों को लेकर कितना गंभीर है।
दकियानूसी तकनीकों के कारण खुद पानी बर्बाद कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान के मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख कमर-उज-जमा के हवाले से रिपोर्ट में कुछ बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे गए हैं, जो बताते हैं कि पाकिस्तान में पानी का संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही और कुप्रबंधन का नतीजा है:
खेती के पुराने तरीके: पाकिस्तान अपने कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले पानी का दो-तिहाई (करीब 66 फीसदी) हिस्सा सिर्फ इसलिए बर्बाद कर देता है क्योंकि वहां आज भी खेती के सदियों पुराने और दकियानूसी तरीके अपनाए जा रहे हैं।
खराब स्टोरेज क्षमता: पूरी दुनिया में सालाना नदी प्रवाह का औसतन 40 फीसदी पानी स्टोर करके रखा जाता है, जबकि पाकिस्तान अपनी नदियों के कुल पानी का महज 10 फीसदी ही बचा पाता है।
नहरों में लीकेज: रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रहे ‘सिंधु बेसिन सिंचाई नहर सिस्टम’ के कारण करीब 25 फीसदी पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में लीक होकर बर्बाद हो जाता है।
खुद पाकिस्तानी सेना के अधिकारी ने माना सच
पाकिस्तान की इस बदहाली और कुप्रबंधन पर खुद उनके अपने अधिकारियों को भी मुहर लगानी पड़ रही है। वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जमील मोहम्मद ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में भौतिक रूप से पानी की इतनी कमी नहीं है, जितनी कमी उसके सही प्रबंधन की है। देश के पास पानी की इतनी प्रचुरता भी नहीं है कि वह इसे इस तरह बेरहमी से बर्बाद करे।
