राजनीति

​केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अयोग्य घोषित करने की मांग; ‘आप’ का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका, कल सुनवाई

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व और पार्टी के पंजीकरण को लेकर एक बेहद संवेदनशील जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका पर अदालत कल सुनवाई करने जा रही है।

​केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अयोग्य घोषित करने की मांग; ‘आप’ का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका, कल सुनवाई

​नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति मामले में कानूनी और राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय में एक नई जनहित याचिका (PIL) दायर कर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को ‘आम आदमी पार्टी’ का राजनीतिक पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई गई है। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट कल (बुधवार) सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।

​क्या हैं याचिका में आरोप?

​हाई कोर्ट में दायर इस याचिका में आम आदमी पार्टी के इन तीनों बड़े नेताओं पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नेताओं ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जानबूझकर दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा का नाम एक कथित घोटाले से जोड़ा और उन्हें बेवजह विवादों में घसीटने का प्रयास किया। याचिका के अनुसार, न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और दबाव बनाने के इस प्रयास के कारण इन नेताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाना चाहिए।

​मामले से जुड़ी पृष्ठभूमि: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को केस से किया अलग

​यह जनहित याचिका ऐसे समय पर आई है जब हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली शराब नीति मामले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है।

​अवमानना की कार्यवाही का आदेश: केस से हटने से ठीक पहले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल सहित ‘आप’ के कई अन्य नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने का एक कड़ा आदेश जारी किया था।

​मामला दूसरी बेंच को ट्रांसफर: इस अवमानना आदेश को पारित करने के तुरंत बाद जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि शराब नीति मामले से जुड़े मुख्य केस को अब उनके बजाय उच्च न्यायालय की कोई दूसरी पीठ (Bench) सुनेगी।

​निचली अदालत से मिल चुकी है बड़ी राहत

​इस पूरे विवाद के बीच, आम आदमी पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि निचली अदालत (Trial Court) इस मामले में उन्हें पहले ही क्लीन चिट दे चुकी है।

​27 फरवरी का ऐतिहासिक फैसला: राउज एवेन्यू स्थित निचली अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले की सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त (Discharge) कर दिया था।

​अदालत की तल्ख टिप्पणी: आरोपियों को बरी करते हुए निचली अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि जांच एजेंसियों द्वारा तैयार किया गया यह पूरा मामला न्यायिक जांच की कसौटी पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता और यह पूरी तरह से निराधार (Groundless) साबित हो चुका है।

​कल की सुनवाई पर टिकी निगाहें

​भले ही निचली अदालत से ‘आप’ नेताओं को बड़ी राहत मिल चुकी है, लेकिन हाई कोर्ट में कल होने वाली इस नई जनहित याचिका की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या नेताओं के बयानों से वाकई न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची है और क्या यह याचिका सुनवाई के योग्य है या नहीं।

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