केरल में यूडीएफ की वापसी: वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण से क्यों गायब रहा ‘इंडिया’ गठबंधन? जानिए इनसाइड स्टोरी
केरल में एक दशक के लंबे इंतजार के बाद यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सत्ता में वापसी और वीडी सतीशन का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। हालांकि, तिरूवनंतपुरम में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के बड़े चेहरों की गैर-मौजूदगी ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
केरल में यूडीएफ की वापसी: वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण से क्यों गायब रहा ‘इंडिया’ गठबंधन? जानिए इनसाइड स्टोरी
तिरूवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज कर करीब 10 साल बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने सत्ता में वापसी की है। लगभग दस दिनों तक चले लंबे मंथन और जद्दोजहद के बाद कांग्रेस आलाकमान ने वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी। इस बड़ी उपलब्धि के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि तिरूवनंतपुरम में एक भव्य और शक्ति प्रदर्शन जैसा शपथ ग्रहण समारोह होगा— ठीक उसी तर्ज पर, जैसा भाजपा असम और पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्रियों के लिए कर चुकी है।
मगर जब वीडी सतीशन और उनकी कैबिनेट ने पद की शपथ ली, तो वहां का नजारा बिल्कुल अलग था। राष्ट्रीय स्तर पर बने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तमाम प्रमुख चेहरे इस समारोह से नदारद थे। आखिर इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है? आइए समझते हैं।
अनूठी राजनीतिक परंपरा: एक ही मंच पर दिखे पक्ष और विपक्ष
राष्ट्रीय नेताओं की कमी के बावजूद, इस समारोह में केरल की समृद्ध राजनीतिक शालीनता और परंपरा का एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला। देश के अन्य राज्यों के उलट, यहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता बेहद सहजता के साथ एक ही मंच पर नजर आए:
पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी: माकपा (CPIM) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन इस समारोह में विशेष रूप से शामिल हुए।
विपक्ष की भागीदारी: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक राजीव चंद्रशेखर के साथ-साथ सीपीआई (CPI) के बिनॉय विश्वम भी मंच पर मौजूद रहे।
कांग्रेस मुख्यमंत्रियों का जमावड़ा: गठबंधन के अन्य दल भले न आए हों, लेकिन कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पार्टी के तमाम राष्ट्रीय दिग्गज इस पल के गवाह बनने तिरूवनंतपुरम पहुंचे थे।
’इंडिया’ गठबंधन के नेता क्यों नहीं आए?
समारोह में विपक्षी एकजुटता न दिखने के पीछे कई स्थानीय और रणनीतिक कारण सामने आए हैं, जिनका खुलासा कांग्रेस सूत्रों ने किया है:
1. एक्टर विजय के न आने की वजह (भीड़ और सुरक्षा का डर)
कांग्रेस ने पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के नवनिवार्चित मुख्यमंत्री और मशहूर अभिनेता विजय को न्योता भेजा था। लेकिन ऐन वक्त पर उनका दौरा रद्द करना पड़ा। केरल में एक्टर विजय की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। रणनीतिकारों का मानना था कि उनके आने से भारी भीड़ उमड़ सकती थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और पूरे वीआईपी मूवमेंट को संभालना मुश्किल हो जाता।
2. ‘तमाशे’ से बचना और स्थानीय राजनीति पर फोकस
केरल कांग्रेस के नेताओं का स्पष्ट मानना था कि वे इस समारोह को किसी राष्ट्रीय तमाशे या शक्ति प्रदर्शन में नहीं बदलना चाहते थे। वे इसे शुद्ध रूप से ‘केरल केंद्रित’ रखना चाहते थे। यही वजह है कि राज्य की ही सभी पार्टियों (चाहे वे सत्ता पक्ष की हों या विपक्ष की) को आमंत्रित किया गया और अनावश्यक वीआईपी प्रोटोकॉल से दूरी बनाई गई।
घटक दलों के साथ राज्यों का अंतर्विरोध और पेचीदा समीकरण
केरल के इस मंच ने ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर राज्यों के स्तर पर चल रहे विरोधाभासों को भी उजागर कर दिया:
आरजेडी (RJD) का समीकरण: कांग्रेस की सबसे पुरानी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केरल में कांग्रेस के विरोधी ‘लेफ्ट फ्रंट’ का हिस्सा है। यहाँ तेजस्वी यादव की पार्टी का एक विधायक भी चुनाव जीता है, जिसने चुनाव के दौरान कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया था।
डीएमके (DMK) से तल्खी: तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा एक्टर विजय की पार्टी को समर्थन देने से डीएमके नाराज चल रही है। स्थिति यहाँ तक पहुंच चुकी है कि डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में कांग्रेस से अलग सीटें आवंटित करने की मांग की है।
सपा और टीएमसी पर सस्पेंस: समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को न्योता दिया गया था या नहीं, इस पर दोनों ही तरफ के नेता खुलकर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसे बुलाना है, यह पूरी तरह केरल प्रदेश कांग्रेस का अधिकार क्षेत्र था।
”दिल्ली में दोस्ती, राज्य में कुश्ती” — संसद में एकजुटता का दावा
’इंडिया’ गठबंधन के भविष्य पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने साफ किया है कि इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय गठबंधन की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक: “राज्यों के समीकरण अलग होते हैं। केरल में मुकाबला लेफ्ट बनाम कांग्रेस का था, जबकि पश्चिम बंगाल में टीएमसी बनाम कांग्रेस का। लेकिन जब दिल्ली में संसद के भीतर ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक होगी, तो लेफ्ट, टीएमसी, सपा और कांग्रेस सब एक साथ बैठेंगे। केंद्र में हम सब भाजपा के खिलाफ पूरी तरह एकजुट हैं और संसद में यह एकजुटता मजबूती से दिखेगी।”
गृह राज्य में होकर भी क्यों नहीं पहुंचे शशि थरूर?
गठबंधन के अलावा, केरल कांग्रेस का सबसे बड़ा और अंतरराष्ट्रीय चेहरा डॉ. शशि थरूर भी इस शपथ ग्रहण समारोह में दिखाई नहीं दिए। हालांकि, थरूर ने किसी भी विवाद से बचने के लिए पहले ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी। उन्होंने बताया कि अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित टफ्ट्स यूनिवर्सिटी (Tufts University) में उनका काफी समय पहले से एक कार्यक्रम तय था, जिसके कारण उन्हें विदेश यात्रा पर जाना पड़ा और वे इस ऐतिहासिक पल में शामिल नहीं हो सके।
