महाराष्ट्र में फिर NCP का आंतरिक कलह उजागर: तटकरे-प्रफुल्ल पटेल की शरद पवार से मुलाकात; बैठकों के दौर से सियासी सरगर्मी तेज़
महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक बड़ा और दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर एक बार फिर पुरानी बनाम नई पीढ़ी की जंग और आंतरिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। चुनाव आयोग को भेजी गई एक सूची और उसके बाद बैठकों के दौर ने राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है।
महाराष्ट्र में फिर NCP का आंतरिक कलह उजागर: तटकरे-प्रफुल्ल पटेल की शरद पवार से मुलाकात; बैठकों के दौर से सियासी सरगर्मी तेज़
मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर गहरे मतभेद और असंतोष की खबरें चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। यह कयास उस वक्त हकीकत में बदलते दिखे, जब चुनाव आयोग (ECI) को भेजी गई पार्टी पदाधिकारियों और मुख्य नेताओं की आधिकारिक सूची से दो सबसे बड़े नाम गायब मिले। इस घटनाक्रम के बाद से पार्टी के भीतर पुरानी और नई पीढ़ी के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है।
’प्रिंटिंग मिस्टेक’ या सोची-समझी रणनीति? कहाँ से शुरू हुआ विवाद
NCP के भीतर चल रहे इस ताजा घमासान की जड़ें चुनाव आयोग को सौंपी गई एक लिस्ट से जुड़ी हैं:
दिग्गजों के नाम गायब: आयोग को भेजी गई पार्टी पदाधिकारियों की सूची में महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल जैसे कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल नहीं थे।
पवार परिवार की नई पीढ़ी को तवज्जो: इसके विपरीत, इसी सूची में पार्थ पवार और जय पवार को शीर्ष प्राथमिकता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई।
सीनियर नेताओं में असंतोष: इस लिस्ट के सामने आते ही पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में भारी नाराजगी फैल गई। हालांकि, विवाद बढ़ता देख सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर इसे महज एक “प्रिंटिंग मिस्टेक” (छपाई की गलती) करार दिया, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीर कमान से छूट चुका था और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने का संदेश साफ था।
शरद पवार से मुलाकात: शिष्टाचार या ‘घर वापसी’ के संकेत?
इस विवाद के बीच सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने हाल ही में एनसीपी के भीष्म पितामह शरद पवार से मुलाकात की।
हालांकि, तटकरे ने इस मुलाकात को केवल शरद पवार के स्वास्थ्य का हालचाल जानने के लिए की गई एक ‘शिष्टाचार मुलाकात’ बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व के तरीकों और पार्टी में नई पीढ़ी (पार्थ और जय पवार) को जरूरत से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ाने पर अपनी गंभीर चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।
सुप्रिया सुले और शरद पवार का अप्रत्यक्ष समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने अप्रत्यक्ष रूप से सुनेत्रा पवार के गुट पर निशाना साधा। दोनों ने सार्वजनिक रूप से सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के पुराने नेतृत्व और उनके योगदान की खुलकर सराहना की। इसने आग में घी का काम किया है और पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं को यह अहसास कराया है कि उनके लिए शरद पवार के दरवाजे अब भी खुले हैं।
बैठकों का दौर: एक गुट बैकफुट पर, शरद पवार एक्शन मोड में
बुधवार को मुंबई में एनसीपी के दोनों ही धड़ों ने बेहद महत्वपूर्ण बैठकें बुलाई थीं, जिससे राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई थी। हालांकि, ऐन वक्त पर समीकरण बदलते दिखे:
सुनेत्रा पवार गुट ने टाली बैठक: आंतरिक कलह और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के बीच सुनेत्रा पवार गुट ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित रणनीतिक बैठक को टालने का फैसला किया है, जिसे उनकी रक्षात्मक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।
वाई. बी. चव्हाण सेंटर में शरद पवार की हुंकार: दूसरी ओर, शरद पवार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने सुबह 11 बजे वाई. बी. चव्हाण सेंटर में अपने गुट के नेताओं और कार्यकर्ताओं की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक संकट, संगठन में मची उथल-पुथल और आगामी चुनावों को लेकर भविष्य की रणनीति पर ठोस चर्चा होने की संभावना है।
निष्कर्ष
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार की भूमिका को एक बार फिर से बेहद मजबूत और प्रासंगिक बना दिया है। तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गजों का सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर सवाल उठाना और शरद पवार का रुख करना यह साफ संकेत देता है कि एनसीपी की अंदरूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि एक नए मोड़ पर आ खड़ी हुई है।
