उत्तराखंड

वेडिंग डेस्टिनेशन बना त्रियुगीनारायण मंदिर: शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर साल 2026 में अब तक हो चुकी हैं 100 से अधिक शादियां

वेडिंग डेस्टिनेशन बना त्रियुगीनारायण मंदिर: शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर साल 2026 में अब तक हो चुकी हैं 100 से अधिक शादियां

उत्तराखंड की पावन केदारघाटी में स्थित पौराणिक एवं विश्वप्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) आज केवल अगाध आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के नवयुगलों के लिए सबसे पसंदीदा और आध्यात्मिक “वेडिंग डेस्टिनेशन” बन चुका है। मान्यता है कि इसी दिव्य स्थल पर सतयुग में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था तथा स्वयं भगवान विष्णु इस अलौकिक विवाह के मुख्य साक्षी बने थे। यही कारण है कि अब देश के कोने-कोने से नवयुगल इस पवित्र धाम में सात फेरे लेने पहुंच रहे हैं।

​समुद्रतल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बसे इस दिव्य स्थल में वर्षभर श्रद्धालुओं और नवविवाहित जोड़ों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, हिमालय की मनमोहक वादियां और अखंड जलती दिव्य अग्नि आधुनिक “डेस्टिनेशन वेडिंग” की चकाचौंध को पीछे छोड़कर सनातन संस्कृति के अनुसार आध्यात्मिक विवाह स्थल के रूप में एक नई पहचान बना रही है।

​”धनंजय अग्नि” को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं नवयुगल

​पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दौरान जो पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित हुई थी, वह आज भी मंदिर परिसर में अखंड रूप से जल रही है। इस पावन ज्योति को “धनंजय अग्नि” कहा जाता है।

​अखंड आशीर्वाद: यहां आने वाले नवयुगल इसी त्रेतायुगीन अखंड अग्नि के समक्ष सात फेरे लेते हैं और अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हैं।

​सुख-समृद्धि की मान्यता: माना जाता है कि इस पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह करने वाले दंपत्तियों को शिव-पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उनका वैवाहिक जीवन सुख, समृद्धि और अटूट प्रेम से परिपूर्ण रहता है।

​तीर्थपुरोहित समिति के सदस्य राजेश भट्ट के अनुसार:

“त्रियुगीनारायण मंदिर अब देशभर के नवयुगलों की पहली पसंद बन चुका है। यहाँ केवल विवाह ही नहीं, बल्कि अपनी शादी की सालगिरह (Wedding Anniversary) मनाने के लिए भी बड़ी संख्या में दंपति पहुंच रहे हैं। इस पवित्र धाम में विवाह करने से नवयुगलों को भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।”

​पूरे देश से पहुंच रहे जोड़े; साल 2026 में अब तक 100 से अधिक शादियां

​त्रियुगीनारायण मंदिर की लोकप्रियता अब स्थानीय न रहकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से हर हफ्ते दर्जनों जोड़े यहां पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) के बढ़ते प्रभाव के चलते इस स्थल को लेकर युवाओं में जबरदस्त क्रेज है।

​2026 के आंकड़े: जानकारी के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक यहाँ करीब 100 शादियां सम्पन्न हो चुकी हैं।

​चारधाम यात्रा का असर: बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से ही लगभग 40 नवयुगल यहाँ विवाह बंधन में बंध चुके हैं। आगामी शुभ मुहूर्तों के लिए भी पुरोहितों और स्थानीय प्रशासन के पास बड़ी संख्या में एडवांस बुकिंग और पूछताछ का सिलसिला जारी है।

​आस्था, अध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम

​बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के बीच स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य का एक अद्भुत नजारा पेश करता है। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन कुंड (ब्रह्म कुंड, विष्णु कुंड और रुद्र कुंड), अखंड धूनी और शांत वातावरण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग और धार्मिक आस्था के बल पर त्रियुगीनारायण मंदिर वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख ‘हेरिटेज वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

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