पश्चिम बंगाल: सुवेंदु सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, मंत्रियों के ‘एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट’ नियुक्त किए गए WBCS अधिकारी
पश्चिम बंगाल: सुवेंदु सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, मंत्रियों के ‘एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट’ नियुक्त किए गए WBCS अधिकारी
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने सोमवार को कैबिनेट मंत्रियों के लिए कई पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) अधिकारियों को “एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट” (Executive Assistant) नियुक्त किया है।
सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों का चयन उनकी साफ-सुथरी, पारदर्शी और राजनीतिक रूप से निष्पक्ष प्रशासनिक छवि को ध्यान में रखते हुए किया गया है। राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इन नियुक्तियों को लेकर आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द कार्यभार संभालने का निर्देश दिया है।
इन प्रमुख अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
नबन्ना (राज्य सचिवालय) से जारी अधिसूचना के अनुसार, शुरुआती चरण में निम्नलिखित अधिकारियों को मंत्रियों के साथ संबद्ध किया गया है:
बिस्वनाथ चौधरी (2013 बैच): इन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट नियुक्त किया गया है। चौधरी वर्तमान में हुगली जिला परिषद में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कृष्ण चंद्र मुंडा (2016 बैच): इन्हें पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री खुदीराम टुडु का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट बनाया गया है। मुंडा इस समय बांकुड़ा जिले में डिप्टी मजिस्ट्रेट-कम-डिप्टी कलेक्टर के रूप में तैनात हैं।
कौशिक कुमार मैती (2016 बैच): इन्हें खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनिया का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट नियुक्त किया गया है। मैती अभी दक्षिण 24 परगना में जिला योजना अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
ईमानदारी और निष्पक्षता को प्राथमिकता
नबन्ना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन अधिकारियों की नियुक्ति से पहले उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की गई थी। चयन प्रक्रिया में पूरी तरह से ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासनिक छवि को ही प्राथमिकता दी गई है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक बिना किसी बाधा के पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।
प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत
स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता में आई भाजपा सरकार ने राज्य की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का पुनर्गठन (Restructuring) शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और राज्य सचिवालय के कामकाज को आधुनिक और चुस्त-दुरुस्त बनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में पिछले कुछ हफ्तों के भीतर कई बड़े तबादले और फेरबदल देखे गए हैं।
संविदा और सेवा विस्तार वाले अधिकारियों पर गिरी गाज
नई सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के समय से सेवा में बने रहे 60 वर्ष से अधिक आयु के 243 अधिकारियों का सेवा विस्तार (Extension) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही, प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के लिए हाल ही में दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को भी मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए नियुक्त किया गया है।
