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समंदर में दुश्मनों के छूटेगे पसीने, नौसेना में शामिल होंगे 4 युद्धपोत

समंदर में दुश्मनों के छूटेगे पसीने, नौसेना में शामिल होंगे 4 युद्धपोत

नई दिल्ली, 18 मई 2026: भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा करते हुए हाल ही में मात्र 48 घंटे के अंदर चार स्वदेशी युद्धपोतों को बेड़े में शामिल किया गया। इस उपलब्धि से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और deterrence क्षमता को मजबूत boost मिला है।

मार्च के आखिरी दिनों (30-31 मार्च 2026) में भारतीय नौसेना ने चार अत्याधुनिक युद्धपोतों को induction किया:

INS दूनागिरी (Dunagiri): Project 17A के तहत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट। ब्रह्मोस मिसाइल, MFSTAR रडार और MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री वाला है।

INS संशोधक (Sanshodhak): बड़ा सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large), जो हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। उन्नत सोनार, AUV और ROV से सुसज्जित।

INS अग्रे (Agray): एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC), जो तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

INS मालवण (Malwan): कोचीन शिपयार्ड द्वारा निर्मित दूसरा ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट, जो उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से लैस है।

आत्मनिर्भरता का प्रतीक

ये सभी युद्धपोत स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर आधारित हैं, जिनमें 75-80% से अधिक इंडिजिनस कंटेंट है। सैकड़ों MSMEs की भागीदारी से यह Aatmanirbhar Bharat अभियान का जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन युद्धपोतों की शामिली से भारतीय नौसेना की:

ब्लू-वॉटर कॉम्बैट क्षमता

पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमता

समुद्री सर्वेक्षण और खुफिया जानकारी

तटीय सुरक्षा

में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 2026 को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष माना जा रहा है, जिसमें कुल 15-19 युद्धपोत शामिल किए जाने की योजना है।

रक्षा मंत्री और नौसेना प्रमुख ने इस उपलब्धि को ‘स्वदेशी शिपबिल्डिंग का मील का पत्थर’ बताया है। दुश्मन अब समुद्र में भारत की बढ़ती ताकत को महसूस कर रहे हैं।

यह induction भारत को 2035 तक 200+ जहाजों वाले बेड़े के लक्ष्य की ओर ले जा रही है।

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