अन्तर्राष्ट्रीय

पाकिस्तान का पाखंड बेनकाब: मध्यस्थ बनने का ढोंग कर सऊदी अरब में तैनात किए लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और 8,000 सैनिक

पाकिस्तान का पाखंड बेनकाब: मध्यस्थ बनने का ढोंग कर सऊदी अरब में तैनात किए लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और 8,000 सैनिक

एक तरफ दुनिया के सामने शांतिदूत और मध्यस्थ बनने का ढोंग और दूसरी तरफ युद्ध की आग में घी डालने का पूरा इंतजाम… पाकिस्तान का यह खतरनाक और दोहरा चेहरा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हो गया है। मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव के बीच जब पूरी दुनिया शांति की अपील कर रही थी, तब इस्लामाबाद पर्दे के पीछे से सऊदी अरब में अपनी भारी सैन्य तैनाती करने में जुटा था। हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान खुद को इस संकट में एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था, लेकिन हकीकत यह है कि उसने चुपचाप सऊदी अरब की सुरक्षा और मदद के लिए अपने लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और हजारों की तादाद में सैनिक रवाना कर दिए थे।

​गोपनीय रक्षा समझौता: सऊदी को मिला पाकिस्तान का ‘परमाणु कवच’!

​’रॉयटर्स’ की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह सामने आया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए एक बेहद गोपनीय रक्षा समझौते के तहत वहां लगभग 8,000 सैनिक, लड़ाकू विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन और एक आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। यह तैनाती इस मकसद से की गई है कि अगर सऊदी अरब पर कोई बाहरी हमला होता है, तो पाकिस्तानी सेना सीधे तौर पर युद्ध में उतर सके।

​खुलासा: इस भारी सैन्य तैनाती का खुलासा पहली बार तीन सुरक्षा अधिकारियों और दो सरकारी सूत्रों के हवाले से हुआ है।

​सीक्रेट डील: सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त रक्षा समझौता हुआ था। हालांकि इसकी शर्तें पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन दोनों देशों ने माना है कि संकट के समय वे एक-दूसरे की रक्षा करेंगे।

​न्यूक्लियर अंब्रेला: दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले भी यह संकेत दिया था कि इस समझौते के तहत सऊदी अरब को पाकिस्तान के ‘न्यूक्लियर अंब्रेला’ (परमाणु सुरक्षा कवच) के दायरे में लाया गया है। यानी जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान, सऊदी अरब के लिए अपनी परमाणु ताकत का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

​जब इस भारी सैन्य गतिविधि को लेकर पाकिस्तान के सैन्य व विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब के सरकारी मीडिया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।

​JF-17 थंडर विमान और चीनी HQ-9 मिसाइल सिस्टम से लैस पाकिस्तानी फौज

​रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अप्रैल की शुरुआत में ही अपने खतरनाक हथियारों की खेप सऊदी अरब भेज दी थी:

​लड़ाकू विमान: पाकिस्तान ने अपने लगभग 16 लड़ाकू विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन सऊदी अरब भेजा है। इनमें ज्यादातर चीन और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित ‘जेएफ-17 थंडर’ (JF-17 Thunder) लड़ाकू विमान हैं।

​ड्रोन और मिसाइल सिस्टम: इसके अलावा, ड्रोन के दो स्क्वाड्रन और चीन में बना बेहद मारक ‘HQ-9 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम’ भी सऊदी अरब की धरती पर तैनात किया गया है।

​कागजों पर ‘ट्रेनिंग’, हकीकत में युद्ध की तैयारी

​इस पूरी सैन्य साजो-सामान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन आधुनिक हथियारों, ड्रोन्स और मिसाइल सिस्टम को ऑपरेट करने वाले सारे जवान और इंजीनियर्स पाकिस्तानी सेना के हैं, जबकि इसका पूरा वित्तीय खर्च सऊदी अरब उठा रहा है। हालांकि, आधिकारिक कागजों पर पाकिस्तानी सेना और वायुसेना के इन जवानों की भूमिका को केवल ‘सलाहकार और ट्रेनिंग’ (Advisory and Training) की बताया गया है, लेकिन हथियारों की आक्रामक प्रकृति और भारी संख्या को देखकर साफ है कि यह पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार और सक्षम फौज है।

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