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एमनेस्टी इंटरनेशनल की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में वैश्विक स्तर पर फांसी के मामलों में रिकॉर्ड उछाल, अकेले ईरान में 2,159 लोगों को दी गई मौत की सजा

एमनेस्टी इंटरनेशनल की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में वैश्विक स्तर पर फांसी के मामलों में रिकॉर्ड उछाल, अकेले ईरान में 2,159 लोगों को दी गई मौत की सजा

दुनियाभर में दी जाने वाली सजा-ए-मौत (कैपिटल पनिशमेंट) को लेकर एक बेहद डरावनी और चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट सामने आई है। मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ (Amnesty International) द्वारा सोमवार को जारी की गई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के दौरान पूरी दुनिया में फांसी के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस खूनी फेहरिस्त में सबसे भयावह स्थिति ईरान की रही है, जहां अकेले साल 2025 में कम से कम 2,159 लोगों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया।

​यह आंकड़ा कितना खौफनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान में साल 1981 के बाद यानी पिछले 44 सालों में किसी भी एक साल के भीतर दी गई यह सबसे ज्यादा फांसी है। वहां साल 2024 के मुकाबले 2025 में फांसी के मामलों में दोगुने से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

​वैश्विक आंकड़ा 1981 के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर, चीन का डेटा ‘सीक्रेट’

​एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साल 2025 में वैश्विक स्तर पर कम से कम 2,707 लोगों को फांसी दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि की है, जो साल 2024 की तुलना में दो-तिहाई से भी ज्यादा है।

​चीन का ‘स्टेट सीक्रेट’: मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इस वैश्विक आंकड़े में चीन का डेटा शामिल नहीं है। चीन को दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश माना जाता है, लेकिन वहां की कम्युनिस्ट सरकार मौत की सजा से जुड़े आंकड़ों को ‘स्टेट सीक्रेट’ (सरकारी गोपनीयता) मानकर छिपाती है ताकि दुनिया के सामने उसकी छवि खराब न हो और जनता में डर का माहौल बना रहे।

​यदि चीन के इन छिपे हुए हजारों मामलों को छोड़ भी दिया जाए, तो भी आधिकारिक तौर पर दर्ज 2,707 का यह वैश्विक आंकड़ा पिछले 4 दशकों में सबसे बड़ा है, जिसने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

​मौत की सजा को बनाया राजनीतिक हथियार; 2026 में भी सिलसिला जारी

​रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ईरान में फांसी के मामलों में यह अप्रत्याशित उछाल तब देखा गया, जब वहां के हुक्मरानों ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मौत की सजा को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

​जंग और असंतोष को कुचलने का प्रयास:

खासकर जून 2025 में इजरायल के साथ भड़की जंग के बाद, ईरानी प्रशासन ने अपनी जनता की आवाज दबाने, आंतरिक असंतोष को कुचलने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों को फंदे पर लटकाया।

​यह सिलसिला यहीं नहीं थमा है। एमनेस्टी और अन्य संगठनों के अनुसार, साल 2026 में भी ईरान इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। जनवरी 2026 में हुए प्रदर्शनों और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने विरोधियों और प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों को मृत्युदंड देने की रफ्तार और तेज कर दी है।

​खाड़ी देशों और सऊदी अरब में भी बढ़ा फांसी का ग्राफ

​ईरान के अलावा मध्य पूर्व (Middle East) के अन्य देशों में भी यही भयावह ट्रेंड देखने को मिला है:

​सऊदी अरब: साल 2025 में कम से कम 356 लोगों को फांसी दी गई, जो साल 2024 में दिए गए 345 फांसी के उसके अपने ही रिकॉर्ड से ज्यादा है।

​कुवैत: सजा-ए-मौत के मामले लगभग तीन गुना बढ़ गए। साल 2024 में जहां 6 लोगों को फांसी दी गई थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 17 हो गई।

​मिस्र और यमन: मिस्र में यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 13 से 23 पर पहुंच गया, जबकि गृहयुद्ध से जूझ रहे यमन में सालभर के भीतर कम से कम 51 लोगों को मौत के घाट उतारा गया।

​अमेरिका और सिंगापुर में भी टूटे कई सालों के रिकॉर्ड

​यह क्रूर ट्रेंड सिर्फ खाड़ी या विकासशील देशों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि विकसित देशों में भी इसके चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

​संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): पूरे अमेरिकी महाद्वीप में यूएसए एकमात्र ऐसा देश रहा जहां 2025 में फांसी दी गई। अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में अचानक बढ़ी मुस्तैदी और वहां रिकॉर्ड 19 फांसियों के चलते देश का कुल आंकड़ा 47 तक पहुंच गया। अमेरिका के लिए साल 2009 के बाद से सजा-ए-मौत का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।

​सिंगापुर: अपने सख्त कानूनों के लिए जाने जाने वाले इस एशियाई देश में साल 2025 के दौरान 17 लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया। सिंगापुर के इतिहास में साल 2003 के बाद से यह फांसी की सबसे बड़ी संख्या है।

​एमनेस्टी की वैश्विक अपील:

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस वैश्विक स्थिति पर बेहद गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने जर्मनी सहित दुनिया की अन्य शक्तिशाली और लोकतांत्रिक सरकारों से अपील की है कि वे इस अमानवीय क्रूरता के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक स्पष्ट, एकजुट और सख्त रुख अपनाएं ताकि इस खूनी सिलसिले पर रोक लगाई जा सके।

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