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Pakistan Cypher Controversy: पाकिस्तान का वो ‘सीक्रेट’ सरकारी दस्तावेज़ जो हुआ लीक; जानें अमेरिकी अधिकारी और पाकिस्तानी राजदूत की बातचीत की 10 बड़ी बातें

Pakistan Cypher Controversy: पाकिस्तान का वो ‘सीक्रेट’ सरकारी दस्तावेज़ जो हुआ लीक; जानें अमेरिकी अधिकारी और पाकिस्तानी राजदूत की बातचीत की 10 बड़ी बातें

पाकिस्तान की राजनीति में पिछले कई सालों से भूचाल लाने वाला खुफिया संदेश यानी “साइफर” (Cypher) एक बार फिर पूरी दुनिया में सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट सरकारी दस्तावेज़ की तस्वीरें सार्वजनिक हो गई हैं, जिसमें पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिकी राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बेहद संवेदनशील बातचीत दर्ज है।

​यह वही गोपनीय दस्तावेज़ है जिसे लहराकर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के पीछे विदेशी (अमरीकी) साजिश थी। इस सीक्रेट साइफर को अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट ‘ड्रॉप साइट’ (Drop Site) ने रिलीज किया है।

https://x.com/i/status/2056088593047629986

​आईये आपको इस लीक हुए साइफर की 10 सबसे बड़ी और मुख्य बातें बताते हैं:

​1. कब और किसके बीच हुई थी यह गोपनीय मुलाकात?

​इस सीक्रेट साइफर में पाकिस्तान के अमेरिका में तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई आधिकारिक मुलाकात का पूरा ब्योरा है। डोनाल्ड लू उस समय अमेरिका के ‘असिस्टेंट सेरेक्ट्री ऑफ स्टेट फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया’ थे। यह मुलाकात 7 मार्च 2022 को हुई थी, जिसके बाद राजदूत ने यह गुप्त संदेश (साइफर) इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भेजा था।

​2. रूस-यूक्रेन युद्ध पर पाकिस्तान के रुख से नाराज था अमेरिका

​बातचीत की शुरुआत में ही डोनाल्ड लू ने रूस-यूक्रेन संकट पर पाकिस्तान की तटस्थ नीति पर कड़े सवाल उठाए। साइफर के अनुसार, लू ने कहा, “अमेरिका और यूरोप में लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि पाकिस्तान इस मामले पर इतना आक्रामक तटस्थ रुख क्यों अपना रहा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि यह नीति पूरी तरह से प्रधानमंत्री इमरान खान की व्यक्तिगत सोच है।

​3. इमरान खान की मॉस्को यात्रा बनी विवाद की असली जड़

​जब पाकिस्तानी राजदूत ने पूछा कि क्या अमेरिका की यह नाराजगी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में वोटिंग से दूर रहने के कारण है, तो डोनाल्ड लू ने साफ इंकार किया। लू ने कहा कि असली वजह पीएम इमरान खान की मॉस्को (रूस) यात्रा है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में जिस समय रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, ठीक उसी वक्त इमरान खान रूस के दौरे पर थे, जिससे वॉशिंगटन बेहद खफा था।

​4. “अविश्वास प्रस्ताव सफल हुआ तो सब माफ कर दिया जाएगा”

​साइफर का यह हिस्सा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है, जिसके दम पर इमरान खान ने सरकार गिराने के आरोप लगाए थे। डोनाल्ड लू ने कथित तौर पर कहा, “अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो वॉशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा, वरना आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं।”

​5. इमरान खान के सत्ता में रहने पर ‘अलगाव’ की चेतावनी

​डोनाल्ड लू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर इमरान खान पाकिस्तान की सत्ता में बने रहते हैं, तो अमेरिका और यूरोप दोनों ही जगहों पर उनका और पाकिस्तान का “अलगाव” (Isolation) बढ़ सकता है। उन्होंने साफ कहा कि इमरान की रूस यात्रा को वॉशिंगटन में एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला माना जा रहा है न कि पूरे देश का।

​6. पाकिस्तानी राजदूत ने दी सफाई— यात्रा पहले से तय थी

​अमेरिकी नाराजगी पर पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने सफाई देते हुए कहा कि इमरान खान की रूस यात्रा कई सालों से तय थी। जब वे मॉस्को पहुंचे, तब तक रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू नहीं किया था। उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए थी और इसे रूस के सैन्य समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

​7. यूक्रेन संकट के बीच अफगानिस्तान के पीछे छूटने का डर

​बातचीत के दौरान अफगानिस्तान का मुद्दा भी गरमाया। पाकिस्तानी राजदूत ने चिंता जताई कि यूक्रेन संकट के कारण दुनिया का ध्यान अफगानिस्तान से हट जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान ने अफगान संघर्ष की भारी कीमत चुकाई है, इसलिए वहां शांति बनाए रखने के लिए रूस सहित सभी बड़ी शक्तियों के साथ संपर्क बनाए रखना इस्लामाबाद की मजबूरी है।

​8. अमेरिका की बेरुखी पर पाकिस्तान ने भी जताई नाराजगी

​साइफर से यह भी साफ होता है कि पाकिस्तान उस समय अमेरिका के व्यवहार से खुश नहीं था। असद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारी से कहा कि पिछले एक साल से पाकिस्तान को महसूस हो रहा है कि अमेरिकी नेतृत्व उनसे दूरी बना रहा है। अमेरिका हर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन तो चाहता है, लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पाकिस्तान की चिंताओं को तवज्जो नहीं देता।

​9. भारत को लेकर अमेरिका के दोहरे रवैये पर सवाल

​कथित दस्तावेज के अनुसार, पाकिस्तानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग व्यवहार कर रहा है। इसके जवाब में डोनाल्ड लू ने खुलकर कहा कि अमेरिका और भारत के संबंधों को ‘चीन के नजरिये’ से देखा जाता है। लू ने यह भी उम्मीद जताई कि यूक्रेन से भारतीय छात्रों के सुरक्षित निकलने के बाद भारत की रूस नीति में बदलाव आ सकता है।

​10. पाकिस्तानी राजदूत का अंतिम आकलन (Assessment)

​साइफर के आखिरी हिस्से में राजदूत असद मजीद खान ने अपना आधिकारिक आकलन लिखा है। उन्होंने नोट किया कि डोनाल्ड लू इतनी कड़ी चेतावनी अमेरिकी सरकार (व्हाइट हाउस) की उच्च स्तरीय मंजूरी के बिना नहीं दे सकते थे। चूंकि लू ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर खुलकर बात की और सीधे धमकी दी, इसलिए पाकिस्तान को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के सामने औपचारिक राजनयिक विरोध (Demarche) दर्ज कराना चाहिए।

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