भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले से भड़के ओवैसी, कहा- ‘बाबरी मस्जिद फैसले जैसी समानताएं’, सुप्रीम कोर्ट से लगाई उम्मीद
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद देश में एक नया सियासी घमासान शुरू हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस अदालती फैसले पर तीखे सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने इस फैसले की तुलना ‘बाबरी मस्जिद’ मामले से करते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलटकर न्याय करेगा।
ओवैसी का आरोप: कोर्ट ने ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ की अनदेखी की
हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
असदुद्दीन ओवैसी का बयान:
“यह फैसला देश के संवैधानिक मूल्यों से मेल नहीं खाता है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद की तरह ही इस फैसले में भी एक धर्म को प्राथमिकता दी गई है, जबकि दूसरों के पूजा के अधिकारों को खत्म कर दिया गया है। कोर्ट ने इस फैसले को सुनाते समय 1935 के धार स्टेट गजट, 1985 के वक्फ रजिस्ट्रेशन और सबसे महत्वपूर्ण ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ (उपासना स्थल अधिनियम) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जो 15 अगस्त 1947 की स्थिति के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने से रोकता है।”
ओवैसी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह के फैसलों ने विवादों का एक नया पिटारा खोल दिया है, जिससे भविष्य में कोई भी किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता और उसके वजूद को चुनौती दे सकता है।
क्या है हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने शुक्रवार (15 मई) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित भोजशाला परिसर को पूरी तरह से वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर घोषित कर दिया।
ASI का 2003 का नियम रद्द: अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साल 2003 के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत थी। अब वहां केवल हिंदू रीति-रिवाज से पूजा होगी।
मस्जिद के लिए अलग जमीन का सुझाव: अदालत ने अपने 242 पन्नों के फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि यह राजा भोज के समय का एक प्राचीन संस्कृत शिक्षण केंद्र और मां सरस्वती का मंदिर था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि मुस्लिम पक्ष आवेदन करता है, तो उन्हें मस्जिद निर्माण के लिए धार जिले में ही किसी दूसरी जगह उपयुक्त भूमि आवंटित करने पर विचार किया जाए।
लंदन से मूर्ति लाने का निर्देश: कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि लंदन के म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने और उसे भोजशाला में फिर से स्थापित करने के प्रयासों पर विचार किया जाए।
मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट, हिंदू पक्ष ने दायर की कैविएट
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद धार के शहर काजी वकार सादिक ने कहा है कि मुस्लिम समुदाय इस फैसले से बेहद निराश है क्योंकि वहां सदियों से नमाज अदा की जा रही थी। मुस्लिम पक्ष अब इस फैसले का कानूनी अध्ययन कर इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
दूसरी ओर, कानूनी लड़ाई में बढ़त बना चुके हिंदू पक्ष (हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस) के वकील विष्णु शंकर जैन ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट (Caveat) याचिका दायर कर दी है, ताकि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष की अपील पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले हिंदू पक्ष की दलीलें अनिवार्य रूप से सुने।
राजनीतिक ब्यूरो, दैनिक समाचार।
