संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद: सुप्रीम कोर्ट की दोनों पक्षों को नसीहत- ‘खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे’, मीडिएशन पूरा होने तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद: सुप्रीम कोर्ट की दोनों पक्षों को नसीहत- ‘खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे’, मीडिएशन पूरा होने तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक परिवार के बीच चल रही मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी पक्ष ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे समझौते की कोशिशों पर बुरा असर पड़े।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद इस मीडिएशन की प्रगति पर नजर रखेगी और इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किसी भी तरह के कंप्लायंस (नियमों के अनुपालन) को लेकर दबाव नहीं बना सकता।
’खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे’ — कोर्ट की भावुक नसीहत
सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने दोनों पक्षों को जीवन की सच्चाई का हवाला देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण नसीहत दी। उन्होंने कहा:
”हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे। हम सिर्फ अपनी आत्मा लेकर जाएंगे। परिवार के सभी लोगों में मामले को सुलझाने की इच्छा होनी चाहिए और किसी को भी भारी मन से मीडिएटर के सामने नहीं जाना चाहिए।”
मां रानी कपूर का पक्ष: बोर्ड मीटिंग्स से बढ़ सकता है विवाद
संजय कपूर की मां रानी कपूर की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मामला पहले ही मीडिएशन के लिए भेजा जा चुका है। ऐसे में अगर दूसरी तरफ से लगातार बोर्ड मीटिंग्स बुलाई जाती रहीं और प्रशासनिक फैसले लिए जाते रहे, तो विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है। उनके वकील ने कहा कि इस तरह की मीटिंग्स से फैमिली ट्रस्ट और उससे जुड़ी संपत्तियों पर असर पड़ सकता है, जिससे चल रही समझौता प्रक्रिया कमजोर हो जाएगी।
रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और अन्य पक्षकारों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के कामकाज में दखल देने से रोकने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने ‘रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा 18 मई को बुलाई गई बोर्ड मीटिंग के नोटिस को भी चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है।
पत्नी प्रिया कपूर का पक्ष: नियमों के तहत हो रहा है काम
दूसरी तरफ, प्रिया कपूर और उनके सहयोगियों के वकीलों ने कोर्ट में सफाई दी कि बुलाई गई बैठकें पूरी तरह से नियमों के दायरे में हैं। उन्होंने दलील दी कि बोर्ड मीटिंग्स आरबीआई (RBI) की गाइडलाइंस और कंपनियों में डायरेक्टर्स की नियुक्ति से जुड़े नियमों के अनुसार ही बुलाई गई थीं। यह केवल कंपनी संचालन (Corporate Governance) से जुड़ी एक सामान्य और जरूरी प्रक्रिया है, इसका उद्देश्य विवाद बढ़ाना नहीं है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि पारिवारिक शांति और समझौते के लिए दोनों पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।
