रेखा गुप्ता के 10 मास्टर स्ट्रोक: दिल्ली में मंत्रियों को करनी होगी मेट्रो की सवारी, कर्मचारियों को मिलेगा Work From Home
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और मितव्ययिता की अपील के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को बड़े पैमाने पर किफायती उपायों का ऐलान किया। सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) अनिवार्य करने से लेकर मंत्रियों-अधिकारियों के लिए ‘मंडे मेट्रो’ तक, सरकार ने पेट्रोल-डीजल खपत कम करने और ट्रैफिक-प्रदूषण नियंत्रण के लिए 10 प्रमुख घोषणाएं की हैं।
रेखा गुप्ता के 10 बड़े ऐलान:
हफ्ते में 2 दिन WFH: दिल्ली सरकार के सभी दफ्तरों में कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य। प्राइवेट कंपनियों को भी दो दिन WFH अपनाने की सलाह।
मंडे मेट्रो: हर सोमवार को ‘मेट्रो मंडे’। सभी मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी मेट्रो से ऑफिस आएंगे-जाएंगे।
पेट्रोल-डीजल कोटा में 20% कटौती: अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते को 250 लीटर से घटाकर 200 लीटर कर दिया गया।
नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर 6 महीने का प्रतिबंध: अगले 6 महीनों तक पेट्रोल, डीजल, CNG या हाइब्रिड वाहनों की नई खरीद नहीं होगी।
विदेश यात्राओं पर रोक: मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राएं एक साल के लिए प्रतिबंधित।
ऑफिस टाइमिंग में बदलाव: सरकारी दफ्तरों के समय को अलग-अलग (सेग्रीगेट) किया जाएगा ताकि सड़कों पर भीड़ कम हो।
न्यूनतम सरकारी वाहनों का इस्तेमाल: सभी विभागों को आधिकारिक गाड़ियों का कम से कम उपयोग करने के निर्देश।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट अलाउंस।
ऑनलाइन मीटिंग्स: जहां संभव हो, सभी बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करनी अनिवार्य।
नो व्हीकल डे: लोगों से ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील, साथ ही कारपूलिंग को बढ़ावा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
ये सभी कदम वैश्विक ऊर्जा संकट, पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती तेल कीमतों के मद्देनजर उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह अभियान 90 दिनों तक चलेगा और लेबर विभाग इसकी निगरानी करेगा।
सीएम ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे भी इन उपायों को अपनाएं ताकि ईंधन बचत के साथ प्रदूषण भी कम हो और ट्रैफिक जाम घटे।
दिल्ली सरकार का यह मितव्ययिता अभियान प्रधानमंत्री के ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान से जुड़ा है। इन उपायों से न सिर्फ सरकारी खर्च में बचत होगी, बल्कि आम लोगों को भी ईंधन संकट का कम असर महसूस होगा।
