NEET-UG विवाद: उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं पर सियासत गर्म, ‘पेपर लीक’ के इतिहास ने तोड़ा युवाओं का भरोसा
NEET-UG विवाद: उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं पर सियासत गर्म, ‘पेपर लीक’ के इतिहास ने तोड़ा युवाओं का भरोसा
देहरादून | विशेष रिपोर्ट: देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे विवाद ने उत्तराखंड की शांत वादियों में राजनीतिक तपिश बढ़ा दी है। प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियां, कांग्रेस और भाजपा, युवाओं के भविष्य के नाम पर आमने-सामने हैं। जहाँ एक ओर विपक्षी दल इसे युवाओं के सपनों पर प्रहार बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम करार दे रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की जंग
कांग्रेस का हमला: “युवाओं के साथ विश्वासघात”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और उनके परिवारों के आर्थिक त्याग को सरकार सुरक्षित नहीं रख पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि:
परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
सत्ता के संरक्षण के बिना इतना बड़ा संगठित नकल गिरोह संभव नहीं है।
उत्तराखंड में पकड़े गए अधिकांश आरोपियों का नाता सत्ताधारी दल से रहा है।
भाजपा का पलटवार: “पर्ची-खर्ची वाली राजनीति हुई खत्म”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इन आरोपों को राजनीतिक अवसरवाद बताया। उन्होंने कहा कि:
केंद्र सरकार ने तुरंत परीक्षा रद्द कर सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए, जो ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण है।
कांग्रेस के शासनकाल में ‘पर्ची और खर्ची’ (सिफारिश और रिश्वत) का बोलबाला था।
सरकार ने नकल माफियाओं के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून लाकर अपनी मंशा साफ कर दी है।
उत्तराखंड में भर्ती घोटालों का काला इतिहास
इन राजनीतिक बहसों के बीच उत्तराखंड के युवाओं का दर्द गहरा है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार गिरी है। यहाँ कई ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए:
UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती: व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद यह मामला देशभर में गूँजा। इसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई।
VDO-VPDO भर्ती घोटाला: एसटीएफ (STF) जांच में सामने आया कि लाखों रुपये लेकर उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। इसमें कई प्रभावशाली चेहरे बेनकाब हुए।
सचिवालय रक्षक भर्ती: यहाँ भी पेपर लीक और दलालों की गहरी पैठ सामने आई।
वन दारोगा और पटवारी-लेखपाल भर्ती: इन परीक्षाओं में अनियमितताओं और पारदर्शिता के अभाव ने अभ्यर्थियों को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया।
पुलिस भर्ती: चयन प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों के चलते यह मामला अदालत की चौखट तक पहुँचा।
धामी सरकार का ‘नकल विरोधी कानून’
भर्ती घोटालों से खराब हुई छवि को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 10 फरवरी 2023 को देश का सबसे सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ लागू किया। इस कानून के तहत:
नकल के दोषियों के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
₹10 करोड़ तक के भारी-भरकम जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
संपत्ति कुर्की और माफियाओं की तत्काल गिरफ्तारी जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: युवाओं में बढ़ता अविश्वास
पेपर लीक अब केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का एक संगठित ‘क्राइम नेटवर्क’ बन चुका है। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में करीब 1800 छात्र इस बार नीट की परीक्षा में बैठे थे, जो अब असमंजस में हैं। वर्षों की मेहनत, कोचिंग का खर्च और मानसिक तनाव झेलने वाले ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए ‘पेपर रद्द’ होना किसी सदमे से कम नहीं है। क्या कड़े कानून और राजनीतिक बयानबाजी इस टूटते भरोसे को वापस जोड़ पाएगी? यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
