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भीषण गर्मी और फिर अचानक तूफान: क्या हम ‘मौसम के न्यू नॉर्मल’ में जी रहे हैं?

भीषण गर्मी और फिर अचानक तूफान: क्या हम ‘मौसम के न्यू नॉर्मल’ में जी रहे हैं?

​नई दिल्ली | विशेष विश्लेषण

​मई का महीना, जो अपनी झुलसाने वाली लू (Heatwave) के लिए जाना जाता है, साल 2026 में एक अलग ही रूप दिखा रहा है। एक तरफ पारा 46°C के पार जा रहा है, तो दूसरी तरफ अचानक आने वाले धूल भरे तूफान, ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश ने लोगों को हैरान कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो यह महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि ‘वेदर व्हिपलैश’ (Weather Whiplash) की स्थिति है, जो अब भारत का ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है।

​आग उगलती गर्मी के बीच तूफान क्यों?

​मई के महीने में इस तरह के विरोधाभासी मौसम के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े वैज्ञानिक कारण हैं:

​वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का टकराव: इस साल हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ बार-बार आ रहे हैं। जब उत्तर भारत के मैदानों की अत्यधिक गर्म हवा इन ठंडी हवाओं से टकराती है, तो वायुमंडल में अस्थिरता पैदा होती है। यही टकराव अचानक हिंसक तूफान और ओलावृष्टि का कारण बनता है।

​समुद्री हीटवेव (Marine Heatwaves): अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान सामान्य से 3-4°C ज्यादा दर्ज किया गया है। गर्म समुद्र हवा में भारी नमी (Moisture) छोड़ रहे हैं। यह नमी जब मैदानी इलाकों की गर्मी से मिलती है, तो ‘थंडरक्लाउड’ (गरजने वाले बादल) तेजी से बनते हैं।

​अल नीनो (El Niño) का प्रभाव: प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति ने हवाओं के सामान्य पैटर्न को बिगाड़ दिया है, जिससे गर्मी और बारिश का संतुलन बिगड़ गया है।

​क्या यही अब ‘न्यू नॉर्मल’ है?

​विशेषज्ञों के अनुसार, अब हमें ऐसे ही मौसम की आदत डालनी होगी। इसके कुछ प्रमुख लक्षण जो भविष्य में बार-बार दिखेंगे:

​अत्यधिक अनिश्चितता: अब गर्मी का मतलब सिर्फ धूप नहीं, बल्कि भीषण लू और अचानक आने वाले विनाशकारी तूफान का मिश्रण होगा।

​रात का तापमान: अब सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी गर्म हो रही हैं (Warm Nights), जिससे शरीर को ठंडा होने का समय नहीं मिलता।

​फ्लैश फ्लड और बादल फटना: प्री-मानसून के दौरान भी अब क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं क्योंकि हवा में नमी सोखने की क्षमता बढ़ गई है।

​खेती और अर्थव्यवस्था पर असर

​मई में होने वाली यह बिना मौसम की बारिश और ओलावृष्टि रबी की बची हुई फसलों और आम जैसे फलों के लिए जहर साबित हो रही है। जानकारों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की हकीकत है।

​”ग्लोबल वार्मिंग के कारण हवा अब ज्यादा नमी सोख रही है। हर 1°C तापमान बढ़ने पर हवा की नमी सोखने की क्षमता 7% बढ़ जाती है, जिसका नतीजा हम अचानक आने वाले इन तूफानों और भारी बारिश के रूप में देख रहे हैं।” – मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट

​दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जारी ‘ऑरेंज’ और ‘येलो’ अलर्ट यह साफ बताते हैं कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। सुरक्षित रहें और मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें।

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