उत्तराखंड

​उत्तराखंड की बेटी का राष्ट्रीय सम्मान: राष्ट्रपति ने पूजा परमार राणा को प्रदान किया ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई 2026) के अवसर पर उत्तराखंड के लिए एक बहुत ही गर्व की खबर सामने आई है। उत्तरकाशी की पूजा परमार राणा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा देश के प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

​उत्तराखंड की बेटी का राष्ट्रीय सम्मान: राष्ट्रपति ने पूजा परमार राणा को प्रदान किया ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’

​नई दिल्ली/उत्तरकाशी: राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने साल 2026 के लिए ‘राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ वितरित किए। इस सूची में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव की एएनएम (ANM) पूजा परमार राणा का नाम प्रमुखता से शामिल रहा।

​क्यों मिला यह प्रतिष्ठित सम्मान?

​पूजा परमार राणा को यह पुरस्कार उनके 15 वर्षों के बेदाग सेवा भाव और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने के लिए दिया गया है:

​कोरोना योद्धा: उन्होंने कोरोनाकाल के दौरान यमुना घाटी के बेहद संवेदनशील इलाकों में पहली वैक्सीनेटर के रूप में अपनी जान की परवाह किए बिना कार्य किया।

​टीकाकरण में मिसाल: दुर्गम क्षेत्रों में शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।

​मातृ-शिशु स्वास्थ्य: उन्होंने न केवल इलाज पहुँचाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के बीच मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का नेतृत्व किया।

​उपलब्धियों का सफर

​यह पहली बार नहीं है जब पूजा के काम को सराहा गया है। इससे पहले उन्हें उत्तराखंड शासन द्वारा राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ एएनएम का पुरस्कार भी मिल चुका है। अब राष्ट्रपति के हाथों मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उनके समर्पण और उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गौरव की बात है।

​टिहरी में भी मनाया गया जश्न: नर्सिंग स्टाफ का सम्मान

​अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के मौके पर टिहरी जिले में भी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया:

​नर्सें हैं रीढ़: सीएमओ डॉ. श्याम विजय और सीएमएस डॉ. अमित राय ने नर्सिंग स्टाफ को सम्मानित करते हुए कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की असली रीढ़ हैं।

​मानवता की सेवा: अधिकारियों ने कहा कि मरीजों की दिन-रात सेवा और देखभाल के प्रति नर्सों का समर्पण मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण है।

​निष्कर्ष:

आज जहाँ देहरादून में बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं पूजा परमार राणा जैसे व्यक्तित्वों का सम्मान यह याद दिलाता है कि नर्सिंग का पेशा सेवा और समर्पण की पराकाष्ठा है। पूजा परमार राणा की यह उपलब्धि उत्तराखंड की सभी नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक प्रेरणा है।

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