उत्तराखंड

यमुनोत्री धाम: आस्था के नाम पर प्रदूषित हो रही यमुना, उद्गम स्थल पर ही लगा कपड़ों का अंबार

यमुनोत्री धाम: आस्था के नाम पर प्रदूषित हो रही यमुना, उद्गम स्थल पर ही लगा कपड़ों का अंबार

​उत्तरकाशी: गंगोत्री धाम के बाद अब यमुनोत्री धाम में भी श्रद्धालुओं द्वारा नदी में वस्त्र अर्पित करने की परंपरा पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। श्रद्धालु यमुना नदी की मुख्य धारा में रंग-बिरंगे अंग-वस्त्र और कपड़े प्रवाहित कर रहे हैं, जिससे नदी अपने उद्गम स्थल पर ही प्रदूषण की चपेट में आ गई है।

​आस्था या पर्यावरण के लिए खतरा?

​यमुनोत्री धाम पहुंच रहे श्रद्धालु मां यमुना के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए मंदिर में चढ़ावा देने के बजाय सीधे नदी में कपड़े और अन्य सामग्री डाल रहे हैं।

​प्रदूषण का अंबार: नदी में डाले गए ये कपड़े बहकर तटों पर जमा हो रहे हैं, जिससे धाम क्षेत्र में कचरे का ढेर लग गया है।

​स्वच्छता पर असर: विशेषज्ञों का कहना है कि कपड़ों और रसायनों के कारण यमुना की निर्मल धारा और जल की शुद्धता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

​तीर्थ पुरोहितों और पर्यावरण प्रेमियों की चेतावनी

​स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, सुरेश उनियाल और मनोज उनियाल सहित अन्य पुरोहितों का कहना है कि:

​श्रद्धालुओं को अपनी आस्था को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना चाहिए।

​यदि समय रहते इन कपड़ों को प्रवाहित करने से नहीं रोका गया, तो यमुना के प्राकृतिक स्वरूप को बचाना कठिन हो जाएगा।

​प्रशासन को केवल दावों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर सख्त नियम लागू करने चाहिए।

​प्रशासन का पक्ष और अपील

​यमुनोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने स्वीकार किया कि यह परंपरा श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था से जुड़ी है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव गंभीर हैं।

​”हम जिला पंचायत और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्वच्छता बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास करेंगे। श्रद्धालुओं से निरंतर अपील की जा रही है कि वे नदी की पवित्रता बनाए रखें और जल में वस्त्र प्रवाहित न करें।”

​निष्कर्ष

​यमुनोत्री धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुरोहित समाज लगातार जागरूकता अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही इसके लिए प्रभावी नियम बनाए जाएंगे ताकि मां यमुना की धारा को प्रदूषण मुक्त रखा जा सके।

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