माली में भीषण नरसंहार: अल-कायदा से जुड़े आतंकियों ने गांवों को बनाया निशाना, 80 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या
माली में भीषण नरसंहार: अल-कायदा से जुड़े आतंकियों ने गांवों को बनाया निशाना, 80 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या
बमाको | विदेश संवाददाता: पश्चिम अफ्रीकी देश माली एक बार फिर जिहादी हिंसा और आतंक की आग में झुलस गया है। मध्य माली के कई गांवों में हुए ताजा हमलों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अल-कायदा से जुड़े आतंकी गुटों ने उन गांवों में खून की होली खेली है, जिन्होंने उनके कट्टरपंथी नियमों और समझौतों को मानने से इनकार कर दिया था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इस नरसंहार में मरने वालों की संख्या 80 के पार पहुंच गई है।
JNIM ने ली हमले की जिम्मेदारी, समझौतों से इनकार पर मिली मौत
इस वीभत्स हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े गुट ‘ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स’ (JNIM) ने ली है। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने उन बस्तियों को जानबूझकर निशाना बनाया जो उनके साथ किसी भी तरह का समझौता करने के खिलाफ थे।
हमलों का सिलसिला: हिंसा की शुरुआत बुधवार को हुई थी जिसमें 30 लोग मारे गए थे, लेकिन शुक्रवार को हुई ताजा हिंसा ने मौत का आंकड़ा दोगुना कर दिया।
भयावह आंकड़े: एक स्थानीय अधिकारी के मुताबिक मरने वालों की संख्या 70 है, जबकि अन्य सूत्रों का दावा है कि यह संख्या 80 से अधिक हो चुकी है।
’हम खून के आंसू रो रहे हैं’: सेना की चुप्पी पर फूटा गुस्सा
आतंकियों के इस तांडव ने स्थानीय निवासियों के मन में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। एक स्थानीय युवा नेता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हम खून के आंसू रो रहे हैं। हमारी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है।”
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप सेना पर है। लोगों का कहना है कि पास ही में सेना की टुकड़ियां तैनात थीं, जिन्हें मदद के लिए बार-बार फोन किए गए और गुहार लगाई गई, लेकिन सैनिकों ने गांव वालों की जान बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उत्तरी माली पर आतंकियों की पकड़ मजबूत
माली में सुरक्षा की स्थिति अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले महीने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा (सैनिक शासन) पर हुए बड़े हमले के बाद आतंकियों के हौसले बुलंद हैं।
गठजोड़ का खतरा: JNIM और तुआरेग विद्रोहियों के संगठन ‘अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट’ (FLA) अब मिलकर ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ बना रहे हैं।
सुरक्षा की विफलता: विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सरकार की सुरक्षा तैयारियों की पोल खुल चुकी है और आतंकी संगठन अब खुलकर रिहाइशी इलाकों को निशाना बना रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
“मध्य और उत्तरी माली अब पूरी तरह से आतंकियों के चंगुल में फंसता नजर आ रहा है। अगर समय रहते अंतरराष्ट्रीय मदद और सख्त सैन्य कार्रवाई नहीं की गई, तो यह क्षेत्र पूरी तरह से अराजकता की भेंट चढ़ जाएगा।”
— वैश्विक सुरक्षा विश्लेषक
क्षेत्र में अब भी दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस नरसंहार की कड़ी निंदा की है।
