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वैश्विक संकट के बीच पीएम मोदी की अपील: पेट्रोल-डीजल बचाएं, एक साल तक टालें विदेश यात्रा और सोने की खरीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच देशवासियों से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और ईंधन की खपत कम करने के लिए नागरिकों से सहयोग मांगा है।

​यहाँ प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य अंशों का व्यवस्थित विवरण दिया गया है:

​वैश्विक संकट और भारत पर इसका प्रभाव

​प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया वर्तमान में कोविड महामारी के बाद उपजे हालातों और युद्ध (यूक्रेन व पश्चिम एशिया) के कारण दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है।

​आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: युद्ध के कारण दुनिया भर में खाद्य सामग्री, ईंधन और उर्वरक (खाद) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं।

​आयात पर निर्भरता: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और गैस के आयात पर निर्भर है, जिससे विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च होता है।

​ईंधन बचाने के लिए ‘कोविड मॉडल’ की वापसी

​पीएम मोदी ने आग्रह किया है कि जो व्यवस्थाएं हमने कोरोना काल में अपनाई थीं, उन्हें फिर से जीवन में उतारने का समय आ गया है:

​वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल बैठकों को फिर से प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि अनावश्यक यात्राओं और ईंधन की बचत हो सके।

​सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: जहाँ मेट्रो की सुविधा है, वहाँ निजी वाहनों के बजाय मेट्रो का उपयोग करें।

​कार-पूलिंग: यदि कार से जाना अनिवार्य हो, तो अकेले जाने के बजाय कार-पूलिंग का विकल्प चुनें।

​रेलवे फ्रेट: सामान की ढुलाई के लिए इलेक्ट्रिक रेलवे सेवाओं का अधिक उपयोग करें।

​इलेक्ट्रिक वाहन (EV): जिनके पास इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ हैं, वे उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें।

​विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कड़े संकल्प

​देश के आर्थिक हित में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से दो विशेष त्याग करने की अपील की है:

​1. विदेश यात्राओं पर रोक (एक साल का संकल्प)

​प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अपील की है कि वे कम से कम एक साल के लिए विदेश यात्रा, विदेशी छुट्टियों और डेस्टिनेशन वेडिंग की योजना को टाल दें। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके स्थान पर भारत के भीतर ही पर्यटन स्थलों का भ्रमण करें।

​2. सोने की खरीद से परहेज

​ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि पहले युद्ध के समय लोग सोना दान करते थे, लेकिन आज दान की जरूरत नहीं है, बस संयम की जरूरत है।

​उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि राष्ट्रहित में एक साल तक किसी भी मांगलिक कार्य या समारोह के लिए सोने के आभूषण न खरीदें, ताकि सोने के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके।

​निष्कर्ष: प्रधानमंत्री की यह अपील ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर आधारित है। उनका मानना है कि व्यक्तिगत स्तर पर की गई ये छोटी बचतें सामूहिक रूप से देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अस्थिरता से बचाने में एक ढाल का काम करेंगी।

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