‘जिस शाख पर बैठे हो वो टूट भी सकती है…’ बृजभूषण की पोस्ट ने सियासी गलियारों में मचाया तूफान
‘जिस शाख पर बैठे हो वो टूट भी सकती है…’ बृजभूषण की पोस्ट ने सियासी गलियारों में मचाया तूफान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के ठीक बाद बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट सियासी गलियारों में तूफान ला गया है। बृजभूषण ने एक्स पर बशीर बद्र की प्रसिद्ध शायरी पोस्ट करते हुए लिखा:
“शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वो टूट भी सकती है…”
यह पोस्ट मंत्रिमंडल विस्तार में उनके बड़े बेटे प्रतीक सिंह को मंत्री न बनाए जाने के बाद आया है, जिसे कई लोग उनके नाराजगी और चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं।
पोस्ट का संदर्भ और मायने
प्रतीक सिंह की अनदेखी: सूत्रों के मुताबिक बृजभूषण अपने बेटे प्रतीक सिंह को मंत्री पद दिलवाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन विस्तार में नए चेहरों को तरजीह दी गई और प्रतीक सिंह को जगह नहीं मिली। इसके तुरंत बाद यह पोस्ट सामने आया।
सियासी संदेश: शायरी की लाइनें सत्ता की नश्वरता, अस्थिरता और ‘शाख’ (जिस पर बैठे हो) के टूटने की चेतावनी देती हैं। इसे योगी सरकार और भाजपा नेतृत्व के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी माना जा रहा है।
बृजभूषण शरण सिंह गोंडा-कैसरगंज क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं और लंबे समय से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण नेता रहे हैं। हाल के महीनों में उनके और सपा के बीच भी संपर्क की खबरें आ रही थीं, जिससे उनकी इस पोस्ट को और ज्यादा तूल मिल रहा है।
सियासी हलचल तेज
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बृजभूषण की नाराजगी को शांत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सपा की ओर से इस पोस्ट को ‘भाजपा में टूट’ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव के हालिया बयानों के साथ मिलाकर देखें तो यूपी की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े दलबदल और समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं।
बृजभूषण का तंज: सत्ता की बुलंदी कितनी भी हो, वह पल भर का तमाशा हो सकती है — यह संदेश न सिर्फ बेटे की उम्मीद पर पानी फेरने वाले फैसले के खिलाफ है, बल्कि उन नेताओं के लिए भी चेतावनी है जो अपनी शाख को बहुत मजबूत समझ बैठे हैं।
क्या यह पोस्ट महज पिता की नाराजगी है या आने वाले समय में बड़े सियासी बदलाव का संकेत? UP की सियासत इस पोस्ट पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
