उत्तराखंड

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की ऊंची उड़ान: PGI 2.0 रैंकिंग में 15वें स्थान पर पहुंचा राज्य, 9 पायदानों का सुधार

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की ऊंची उड़ान: PGI 2.0 रैंकिंग में 15वें स्थान पर पहुंचा राज्य, 9 पायदानों का सुधार

​देहरादून: उत्तराखंड ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। भारत सरकार द्वारा जारी वर्ष 2024-25 की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट में उत्तराखंड ने लंबी छलांग लगाते हुए देशभर में 15वां स्थान हासिल किया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह एक बड़ा सुधार है, जब राज्य 24वें स्थान पर था।

​श्रेणी में भी हुआ उल्लेखनीय सुधार

​उत्तराखंड ने न केवल रैंकिंग सुधारी है, बल्कि अपनी श्रेणी (Category) में भी पदोन्नति हासिल की है। राज्य को पहले ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इस बार बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उसे ‘प्रचेष्टा-3’ श्रेणी में शामिल किया गया है। राज्य ने कुल 584.5 अंक प्राप्त किए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 58.2 अंक अधिक हैं।

​विभिन्न मानकों पर प्रदर्शन का विश्लेषण

​रिपोर्ट में राज्य के प्रदर्शन का आकलन 6 प्रमुख डोमेन और 72 सूचकांकों के आधार पर किया गया है:

​समानता एवं समावेशन: राज्य का सबसे शानदार प्रदर्शन इसी क्षेत्र में रहा, जहाँ 260 में से 222.2 अंक मिले। यह दर्शाता है कि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हुई है।

​आधारभूत संरचना: स्कूल भवन, पेयजल, शौचालय और डिजिटल संसाधनों के लिए राज्य को 84.9 अंक मिले।

​एक्सेस (पहुंच): विद्यालयों की उपलब्धता और नामांकन के क्षेत्र में 64.7 अंक प्राप्त हुए।

​गवर्नेंस प्रोसेसेज: प्रशासनिक सुधार और निगरानी व्यवस्था के लिए 78.5 अंक मिले।

​शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों की ट्रेनिंग और क्षमता विकास में राज्य ने 66.8 अंक हासिल किए।

​लर्निंग आउटकम्स: विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में 67.4 अंक मिले हैं, हालांकि विभाग इस क्षेत्र में और सुधार पर ध्यान दे रहा है।

​सुधार के पीछे मुख्य कारक

​उत्तराखंड की इस सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण सरकारी पहलों का योगदान माना जा रहा है:

​NEP 2020 का प्रभाव: राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने से गुणवत्ता और तकनीक के उपयोग में सुधार हुआ है।

​डिजिटल शिक्षा: स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधनों और डेटा-आधारित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया गया।

​शिक्षक विकास: शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का समावेश किया गया।

​प्रशासनिक मुस्तैदी: शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आई है।

​भविष्य का लक्ष्य

​शिक्षा विभाग अब अगले चरण में ‘लर्निंग आउटकम्स’ और ‘आधारभूत संरचना’ जैसे क्षेत्रों में और सुधार की रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग का लक्ष्य विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना और डिजिटल शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि आगामी वर्षों में उत्तराखंड देश के शीर्ष राज्यों में अपनी जगह बना सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *