अन्तर्राष्ट्रीय

​ट्रंप को तगड़ा झटका: 10% ग्लोबल टैरिफ को कोर्ट ने बताया ‘अवैध’, जानें पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।

​यह फैसला 7 मई 2026 को आया है, जो ट्रंप के ‘ट्रेड वॉर’ एजेंडे के लिए एक बड़ी बाधा माना जा रहा है। यहाँ इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​ट्रंप को तगड़ा झटका: 10% ग्लोबल टैरिफ को कोर्ट ने बताया ‘अवैध’, जानें पूरा मामला

​वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी टैरिफ योजना को अदालत में करारी हार का सामना करना पड़ा है। तीन जजों की एक बेंच ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार कानून (Trade Act of 1974) के तहत अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।

​कोर्ट ने क्या कहा?

​अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन ने जिस कानून (Section 122) का सहारा लेकर ये टैरिफ लगाए थे, वह केवल ‘गंभीर भुगतान संतुलन’ (Balance-of-Payments) संकट के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार:

​यह टैरिफ “अवैध” और “कानून द्वारा अनधिकृत” हैं।

​राष्ट्रपति के पास केवल व्यापार घाटे को कम करने के लिए इस तरह के व्यापक वैश्विक टैक्स लगाने की असीमित शक्ति नहीं है।

​छोटे व्यवसायों और आयातकों पर इसका गलत वित्तीय बोझ पड़ रहा था।

​क्यों लगाए गए थे ये 10% टैरिफ?

​दरअसल, यह ट्रंप की दूसरी कोशिश थी। इससे पहले 2025 में उन्होंने लगभग हर देश पर भारी-भरकम ‘लिबरेशन डे टैरिफ’ लगाए थे, जिसे फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। उस हार के तुरंत बाद, ट्रंप ने कानून के एक दूसरे सेक्शन का इस्तेमाल कर 10% का ‘अस्थायी’ टैरिफ लगा दिया था, जिसे अब निचली अदालत ने भी खारिज कर दिया है।

​किन पर होगा असर?

​फिलहाल, यह फैसला उन कंपनियों (जैसे टॉय कंपनी Basic Fun! और स्पाइस कंपनी Burlap & Barrel) के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने इसे चुनौती दी थी। हालांकि, यह फैसला अभी केवल उन्हीं पार्टियों पर लागू है जिन्होंने केस लड़ा था, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अब हजारों अन्य कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया है कि वे अपना दिया हुआ टैक्स वापस मांग सकें।

​आगे क्या होगा?

​ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ फेडरल सर्किट कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहा है। व्हाइट हाउस का तर्क है कि ये टैरिफ अमेरिकी उद्योगों को बचाने और विदेशी निर्भरता कम करने के लिए जरूरी हैं।

​मुख्य प्रभाव:

​महंगाई में कमी: यदि यह फैसला पूरी तरह लागू होता है, तो अमेरिका में आयातित सामान (इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, कपड़े) सस्ते हो सकते हैं।

​भारत और अन्य देशों को राहत: भारत जैसे देशों के लिए यह खबर अच्छी है, क्योंकि उनकी वस्तुओं पर लगने वाला अतिरिक्त बोझ अब कम हो सकता है।

​कानूनी जंग: यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुँच सकता है, जिससे व्यापार जगत में अनिश्चितता बनी रहेगी।

​ट्रंप प्रशासन के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ वे वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें घरेलू अदालतों में अपनी ही नीतियों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *